October 8, 2025 पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृपक्ष का समय सर्वोत्तम है। यह उपाय सरल और तीव्र प्रभावी है, बिना जटिल पूजा-पाठ के। धन हानि, पारिवारिक कलह, संतान बाधा, मन अशान्ति, बिगड़े कार्य आदि में लाभकारी। साधना/क्रिया विधान समय: पितृपक्ष के दौरान, सुबह 4 बजे जागें। प्रारंभिक क्रिया: मुख्य द्वार के बाहर थोड़ी जमीन पर झाड़ू लगाएँ। फिर उस स्थान पर पानी छिड़कें। अर्घ्य: घर की स्त्री मुख्य द्वार पर पानी का एक लोटा अर्घ्य दे। यह क्रिया प्रतिदिन जीवन भर की जा सकती है। भोजन सामग्री तैयार करना: नहा धोकर खीर और पूड़ी बनाएं। भोजन को पत्तल में रखें, पानी का गिलास भी साथ रखें। स्थान चयन और आसन: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके छत या खुले स्थान पर बैठें। सामने सफेद आसन बिछाएं और उस पर पत्तल रखें। पितरों का आवाहन: हाथ में चावल लेकर मानसिक रूप से पितरों का आवाहन करें। पितरों को आसन पर बैठाने के लिए चावल डालें। भोजन अर्पित करना: खीर, पूड़ी और सब्ज़ी का भोजन पितरों को कराएं। 10–12 मिनट वहाँ बैठकर मानसिक प्रार्थना करें। समापन: पितरों को प्रणाम करें और मानसिक आशीर्वाद लें। कुछ पूड़ी कौए, गाय, कुत्ते आदि को खिलाएँ। स्वयं भोजन करें और दैनिक कार्य करें। अवधि: इस क्रिया को लगातार 15 दिन करें। अमावस्या या किसी विशेष शुभ दिन पर इसे दोहरा सकते हैं। सारांश तालिका विषयविवरणदिनपितृपक्ष के 15 दिनसमयसुबह 4 बजेवस्त्रसफेद (साफ और पवित्र)आसनसफेदभोगखीर, पूड़ी, सब्ज़ी, पानीदिशादक्षिण मुखपूजनपितरों का आवाहन (मानसिक)कवच प्रयोगनहींविशेष ध्यानमानसिक प्रार्थना और श्रद्धा बनाए रखें सावधानी / नियम क्रिया सरल और श्रद्धा सहित करें, जल्दी-जल्दी नहीं। भोजन और आसन सफेद रंग का हो। खीर-पूड़ी अन्य जीवों को भी थोड़ी मात्रा में खिलाएं। इस प्रयोग को 15 दिन लगातार करें। पितरों की कृपा मिलने पर घर में शांति, रौनक और कार्यों में सफलता होगी। Share this… Facebook Whatsapp Messenger Twitter Linkedin Threads Telegram Email Copy