यह साधना विशेष रूप से सावन मास में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने हेतु की जाती है।
इसे आप किसी भी सांसारिक इच्छा जैसे — धन, नौकरी, संतान, रोगमुक्ति, या साधना सिद्धि के लिए कर सकते हैं।

यह पूर्णतः सिद्ध एवं अनुभव की हुई साधना है।
सावन में जो भी साधक इसे श्रद्धा से करता है, उसे अवश्य लाभ प्राप्त होता है।


📜 साधना सारणी

क्रमतत्वविवरण
1दिनपूरा सावन मास या किसी भी सोमवार से प्रारंभ
2दिन जाप30 दिन
3समयप्रातः 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक
4वस्त्रसफेद
5आसनलाल या सफेद
6मालारुद्राक्ष
7जापयथाशक्ति (कम से कम 11 माला प्रतिदिन)
8दिशापश्चिम मुख
9पूजन विधिपंचोपचार
10कवच प्रयोगनहीं
11पूजन क्रमगुरु, गणेश, ईष्ट, पितर, कुलदेवता, शिव जी, कुबेर, लक्ष्मी माता
12भोगसफेद मिठाई

(नित्य पूजन साधना से पहले अलग से करें)


🕉️ साधना विधि

  1. सोमवार की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  2. 108 विल्वपत्र एकत्र करें (कुछ अतिरिक्त पूजा हेतु)।
  3. पहले दिन 21 आक के फूलों की माला बनाएं।
  4. धतूरे के फूल साथ रखें।
  5. शिवलिंग घर में स्थापित करें या किसी मंदिर में पूजा करें।
    (ध्यान रखें – मंदिर में कोई रोक-टोक न हो, क्योंकि पूजा 2–3 घंटे तक चल सकती है।)
  6. पश्चिम मुख होकर, सफेद वस्त्र धारण करें और आसन ग्रहण करें।
  7. गुरु, गणेश, ईष्ट, पितर, कुलदेवता, स्थानदेव, लक्ष्मी, कुबेर आदि का पंचोपचार पूजन करें।
  8. अब अपनी इच्छा अनुसार संकल्प लें — “मैं (अपना नाम) अमुक कार्य हेतु 108 विल्वपत्रों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर भगवान शिव को समर्पित करने का संकल्प लेता हूँ।”
  9. इसके बाद शिवलिंग पर क्रमशः अभिषेक करें —
    दूध, शहद, घी, दही, गंगाजल, इत्र, गन्ना रस, छाछ आदि से।
  10. तत्पश्चात शिवलिंग को जल से स्नान कराएँ और चन्दन, अक्षत, इत्र, विल्वपत्र, आक पुष्पमाला, धतूरा, मिठाई का भोग लगाएँ।
  11. अब चन्दन या अष्टगंध से अनार या विल्वपत्र की कलम द्वारा प्रत्येक विल्वपत्र पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखें।
  12. प्रत्येक बार लिखते हुए उसी मंत्र का उच्चारण करें और पत्र शिवलिंग पर अर्पित करें।
  13. इस प्रकार 108 विल्वपत्र अर्पण करें।
  14. इसके बाद कम से कम 11 माला ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
  15. अंत में शिव आरती करें और फल भगवान शिव को समर्पित करें।

🔮 साधना का परिणाम

यह साधना यदि पूरे सावन मास अथवा 30 दिन तक की जाए तो
साधक की हर इच्छा — चाहे धन, संतान, नौकरी, व्यवसाय, रोगमुक्ति या सिद्धि — पूर्ण होती है।
नियमित रूप से हर वर्ष सावन में यह साधना करने से
शिव कृपा स्थायी रूप से बनी रहती है और जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन आते हैं।