September 19, 2025 सनातन धर्म में वैष्णव पद्धति को सदैव सरल, सौम्य और सात्विक माना गया है।जो साधक इस पद्धति को जानते हैं और नियमित साधना करते हैं, वे भलीभांति समझते हैं कि –🌼 इस पूजा से घर में चिरस्थायी लक्ष्मी का वास होता है।🌼 वैष्णव शक्तियाँ शीघ्र अप्रसन्न नहीं होतीं।🌼 किंतु यदि वे अप्रसन्न हो जाएँ और समय रहते प्रसन्न न की जाएँ, तो उग्र और तामसिक शक्तियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। 👉 निष्कर्ष: इन सात्विक शक्तियों का सदैव आदर और सम्मान करें। 🔹 कब करें: प्रतिदिन रात्रि में सोने से पहले🔹 कहाँ करें: घर के मंदिर में, पूर्व दिशा की ओर मुख करके 🔹 विधि: शुद्ध होकर बैठें। नीचे आसन बिछाएँ।इस स्तोत्र का 5 बार पाठ करें। ✨ फल: शीघ्र ही आपकी मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी। आजीविका एवं अज्ञात स्रोतों से भी धन लाभ होगा। यह प्रयोग शत-प्रतिशत परीक्षित और सिद्ध है। 🛡 शत्रुनाश प्रयोग यदि कोई प्रबल शत्रु या उसका परिवार आपसे अकारण वैर रखता हो और आपके परिवार को जीवन हानि का भय हो, तो यह उपाय करें – 🔹 कब करें: सूर्यास्त के बाद🔹 कहाँ करें: किसी चौराहे पर🔹 विधि: शुद्ध होकर चौराहे पर बैठें। इस स्तोत्र का 5 बार लगातार पाठ करें। यह प्रयोग लगातार 3 या 5 रविवार तक करें। ✨ फल: शत्रु धीरे-धीरे निर्बल हो जाएगा। वह दरिद्रता और व्याधियों से ग्रस्त होकर नगर छोड़ देगा। आपके परिवार को भयमुक्त जीवन मिलेगा। श्रीकृष्ण कीलक ॐ गोपिका-वृन्द-मध्यस्थं, रास-क्रीडा-स-मण्डलम्। क्लम प्रसति केशालिं, भजेऽम्बुज-रूचि हरिम्।। विद्रावय महा-शत्रून्, जल-स्थल-गतान् प्रभो ! ममाभीष्ट-वरं देहि, श्रीमत्-कमल-लोचन !।। भवाम्बुधेः पाहि पाहि, प्राण-नाथ, कृपा-कर ! हर त्वं सर्व-पापानि, वांछा-कल्प-तरोर्मम।। जले रक्ष स्थले रक्ष, रक्ष मां भव-सागरात्। कूष्माण्डान् भूत-गणान्, चूर्णय त्वं महा-भयम्।। शंख-स्वनेन शत्रूणां, हृदयानि विकम्पय। देहि देहि महा-भूति, सर्व-सम्पत्-करं परम्।। वंशी-मोहन-मायेश, गोपी-चित्त-प्रसादक । ज्वरं दाहं मनो दाहं, बन्ध बन्धनजं भयम्।। निष्पीडय सद्यः सदा, गदा-धर गदाऽग्रजः । इति श्रीगोपिका-कान्तं, कीलकं परि-कीर्तितम्।। यः पठेत् निशि वा पंच, मनोऽभिलषितं भवेत्। सकृत् वा पंचवारं वा, यः पठेत् तु चतुष्पथे।। शत्रवः तस्य विच्छिनाः, स्थान-भ्रष्टा पलायिनः। दरिद्रा भिक्षुरूपेण, क्लिश्यन्ते नात्र संशयः।। Share this… Facebook Whatsapp Messenger Twitter Linkedin Threads Telegram Email Copy