हनुमानजी की साधना कोई साधारण कार्य नहीं है। यह मार्ग साहस, संयम और अटूट श्रद्धा मांगता है।
जो साधक हनुमानजी की कसौटी पर खरा उतरता है, वही हनुमान साधना में सिद्धि प्राप्त कर सकता है।

हनुमानजी का कोई भी शाबर मंत्र सिद्ध करने के लिए साधक को ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है।
मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखना साधना की पहली शर्त है।
पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ मंत्रजाप करने पर हनुमानजी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और साधक की सारी बाधाएँ दूर हो जाती हैं।

हनुमान शाबर मंत्र का महत्व
हनुमान शाबर मंत्र प्राचीन तांत्रिक परंपरा में अत्यंत शक्तिशाली माने जाते हैं।
इनका जप करने से साधक को भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।
मंत्रजाप से साधक के भीतर साहस, शक्ति और आत्मविश्वास जागृत होता है।

मुख्य लाभ:

  • शत्रु और बाधाओं का निवारण

  • मानसिक और शारीरिक शक्ति में वृद्धि

  • तंत्र-मंत्र और भूत-प्रेत से रक्षा

  • कार्य सिद्धि और इच्छापूर्ति

हनुमान शाबर मंत्रों का सही उच्चारण, सही समय और नियमपूर्वक जप करना अत्यंत आवश्यक है।
बिना गुरु मार्गदर्शन या विधिवत तैयारी के इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

“ॐ अंजनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि, तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्।”

यह मंत्र हनुमानजी की आराधना और साधना के लिए प्रचलित है। इसका जाप करने से भक्त को बुद्धि, बल, स्थैर्य और ध्यान की प्राप्ति होती है। यह मंत्र अनुष्ठानों के द्वारा और गुरु के मार्गदर्शन में ही किये जाने चाहिए। इसके अलावा, अपने इष्ट देवता के प्रति श्रद्धा और निष्ठा रखना भी महत्वपूर्ण है।इसके साधना हेतु नवरात्रि में हनुमान जी के विषयक नियमो का ध्यान रखे जैसे ब्रह्मचर्य ,मांस मदिरा से दुरी ,स्वय के हाथ से भोजन पकाकर खाना ,जमीन पर सोना ये सब नियम रखकर करना होता है |

जप अगर हनुमान मन्दिर में कर  सकते है तो सबसे बेस्ट लेकिन रोज वहीँ पर करना होगा जगह नही बदल सकते |

हनुमान मूर्ति को चोला चढाकर एक मीठा पान लंगोटपांच लड्डू तुलसी दल रखकर चढाये ,गुड चना चढाये ,कुछ लोग सुखडी भी चढाते है |भोग में केले का भोग भी लगेगा |भोग के बाद साडी सामग्रि रात को ही  किसी एकांत स्थान में  गड्डा खोदकर दबा दी जाती है |क्योंकि ये भोग दुसरो को नही बंटता |रोज एक फिक्स  समय पर जाप होगा मन्त्र का 31 माला |माला से पहले आँख बंधकर रामजी माता सीताजी और हनुमानजी  माता अंजना जी का ध्यान करना होता है|दिन भर राम राम करते रहे | इसे 11 दिन कम से कम और ४१ दिन पूर्ण साधना हेतु कर  सकते हैं