नज़र टोक या बुरी नज़र वह अदृश्य नकारात्मक शक्ति मानी जाती है जो किसी व्यक्ति की ईर्ष्या, द्वेष या जलन से उत्पन्न होती है। जब कोई व्यक्ति किसी की सुंदरता, सफलता या उन्नति को देखकर मन ही मन ईर्ष्या करता है, तो उसकी नकारात्मक ऊर्जा उस व्यक्ति के चारों ओर फैल जाती है। इसे ही नज़र लगना कहा जाता है। भारत के अनेक हिस्सों में आज भी नज़र टोक से बचने के लिए पारंपरिक उपाय किए जाते हैं, जैसे—शिशु के माथे पर काजल लगाना, घर के बाहर नींबू-मिर्च टांगना या नज़र बट्टू लटकाना। कई लोग शनिवार या मंगलवार को राई, नमक और लाल मिर्च से “नज़र उतारने” की विधि अपनाते हैं। आयुर्वेद और तंत्र दोनों ही इसे सूक्ष्म ऊर्जा का असंतुलन मानते हैं, जो व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्रभावित करता है। नज़र टोक से बचने का सबसे सरल उपाय है—सकारात्मक सोच बनाए रखना, नियमित मंत्र-जप करना और ईश्वर पर दृढ़ विश्वास रखना, क्योंकि श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से कोई भी बुरी नज़र अपना प्रभाव नहीं डाल सकती।

इस मंत्र को एक हजार बार जप कर सिद्ध कर ले। फिर मोर पंख से झाड़े।
इससे लड्डू या रोटी से उतारा भी कर सकते है |इस मंत्र से चीनी बना कर भी देते हैं
सभी साधक इसका प्रयोग अलग अलग तरीके से करते हैं। कोई विभूति बना कर देती है कोई जल कोई लकड़ी का कोयला

काला भैरों कपले केश
कानों कुंडल भगबां भेष
हिन्दू को काशी मुसलमान को मक्का लगे लगाए को लगे तेरी मेहर का धक्का
काली माई की फिरे दुहाई