November 19, 2025 मंत्र प्रयोग से पहले उसका विधिवत सिद्ध होना अनिवार्य माना गया है, और इस सिद्धि की शास्त्रीय प्रक्रिया को “मंत्र पुरश्चरण” कहा जाता है। पुरश्चरण पाँच मुख्य अंगों से मिलकर बनता है—जाप, हवन, अर्पण, तर्पण और मार्जन। इन क्रियाओं के माध्यम से मंत्र जाग्रत होकर पूर्ण रूप से सिद्ध होता है Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content. Join Now Already a member? Log in here