November 19, 2025 गायत्री मंत्र वेदों का हृदय, ऋषियों का शुद्धतम ज्ञान और सनातन धर्म की सर्वोच्च प्रार्थना माना गया है। यह मंत्र केवल देव-उपासना नहीं, बल्कि चेतना के पूर्ण जागरण का सूत्र है। ऋग्वेद में प्रकट यह दिव्य महामंत्र मन, प्राण और आत्मा की तीनों शक्तियों को पवित्र कर साधक को तेज, बुद्धि और धारणा प्रदान करता है। गायत्री देवी को वेद-माता कहा गया है, क्योंकि उनका प्रकाश अज्ञान को मिटाकर साधक को सत्य, धर्म और ज्ञान की ओर ले जाता है। नित्य जाप से चित्त शांत होता है, विचार शुद्ध होते हैं और जीवन में एक अदृश्य दैवी संरक्षण अनुभव होने लगता है। इसीलिए यह मंत्र सभी मंत्रों में सर्वोच्च, सार्वभौमिक और कल्याणकारी माना गया है। आइये जानते है विभिन्न गायत्री मन्त्र सूर्य गायत्री 1) ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ 2) ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तन्नोः भानुः प्रचोदयात् ॥ 3) ॐ प्रभाकराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नोः सूर्यः प्रचोदयात् ॥ 4) ॐ अश्वध्वजाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नोः सूर्यः प्रचोदयात् ॥ 5) ॐ भास्कराय विद्महे महद्द्युतिकराय धीमहि तन्नोः आदित्यः प्रचोदयात् ॥ 6) ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकराय धीमहि तन्नोः सूर्यः प्रचोदयात् ॥ 7) ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नोः सूर्यः प्रचोदयात् ॥ 8) ॐ भास्कराय विद्महे महद्द्युतिकराय धीमहि तन्नोः सूर्यः प्रचोदयात् ।। चन्द्र गायत्री…9) ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नो श्चन्द्रः प्रचोदयात् ॥ 10) ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृतत्वाय धीमहि तन्नोश्चन्द्रः प्रचोदयात् ॥ 11) ॐ निशाकराय विद्महे कलानाथाय धीमहि तन्नोः सोमः प्रचोदयात् ॥ मंगळ गायत्री…12) ॐ वीरध्वजाय विद्महे विघ्नहस्ताय धीमहि तन्नोः भौमः प्रचोदयात् ॥ 13) ॐ अङ्गारकाय विद्महे भूमिपालाय धीमहि तन्नोः कुजः प्रचोदयात् ॥ 14) ॐ चित्रिपुत्राय विद्महे लोहिताङ्गाय धीमहि तन्नोः भौमः प्रचोदयात् ॥ 15) ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नोः भौमः प्रचोदयात् ॥ बुध गायत्री…16) ॐ गजध्वजाय विद्महे सुखहस्ताय धीमहि तन्नोः बुधः प्रचोदयात् ॥ 17) ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणी प्रियाय धीमहि तन्नोः बुधः प्रचोदयात् ॥ 18) ॐ सौम्यरूपाय विद्महे वाणेशाय धीमहि तन्नोः बुधः प्रचोदयात् ॥ गुरु गायत्री…19) ॐ वृषभध्वजाय विद्महे क्रुनिहस्ताय धीमहि तन्नोः गुरुः प्रचोदयात् ॥ 20) ॐ सुराचार्याय विद्महे सुरश्रेष्ठाय धीमहि तन्नोः गुरुः प्रचोदयात् ॥ शुक्र गायत्री…21) ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नोः शुक्रः प्रचोदयात् ॥ 22) ॐ रजदाभाय विद्महे भृगुसुताय धीमहि तन्नोः शुक्रः प्रचोदयात् ॥ 23) ॐ भृगुसुताय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नोः शुक्रः प्रचोदयात् ॥ शनि गायत्री…24) ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नोः मन्दः प्रचोदयात् ॥ 25) ॐ शनैश्चराय विद्महे सूर्यपुत्राय धीमहि तन्नोः मन्दः प्रचोदयात् ॥ 26) ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नोः सौरिः प्रचोदयात् ।। राहू गायत्री…27) ॐ नागध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि तन्नोः राहुः प्रचोदयात् ॥ 28) ॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नोः राहुः प्रचोदयात् ॥ केतू गायत्री…29) ॐ अश्वध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नोः केतुः प्रचोदयात् ॥ 30) ॐ चित्रवर्णाय विद्महे सर्परूपाय धीमहि तन्नो केतुः प्रचोदयात् ॥ 31) ॐ गदाहस्ताय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नोः केतुः प्रचोदयात् ॥ Share this… Facebook Whatsapp Messenger Twitter Linkedin Threads Telegram Email Copy