साधना की सफलता का प्रथम आधार सही और शुद्ध प्राथमिक पूजन माना गया है।
बहुत से साधक बिना पूजन-विधि जाने ही साधना प्रारंभ कर देते हैं, जिसके कारण साधना अधूरी या निष्फल रह जाती है।
प्राथमिक पूजन साधक और देवी-देवताओं के बीच आध्यात्मिक सेतु का निर्माण करता है।
यह पूजन साधना के स्थान, शरीर, मन और ऊर्जाक्षेत्र—सभी को पवित्र बनाते हुए साधना को सफल होने योग्य बनाता है।
इस विधि को सही ढंग से अपनाने पर साधक को दिव्यता की कृपा सहजता से प्राप्त होने लगती है।

प्राथमिक पूजन विधि

१. आसन मंत्र

सबसे पहले नहा धोकर साफ कपड़े पहनें।
फिर आसन पर बैठकर यह मंत्र एक बार पढ़ें—
“मन मार मैदान करू करू मे चकना चूर पॉच महेश्वर आज्ञा करो तो बैठू आसन पूर”


२. पवित्रीकरण (शुद्धिकरण)

बाएँ हाथ में जल लें, दाएँ हाथ की पाँचों उंगलियाँ जल में डालें और मंत्र बोलें—
“ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वेस्थाम गतोअपि स्मेरेत पुडिरीकाक्षः सः बाह्म्भयंतर शुचि ॐ पुनात पुडंरीकाक्षाय ॐ पुनात पुडंरी काक्षाय ॐ पुनात पू”
फिर यह जल सिर पर और पूरी सामग्री पर छिड़क दें।


३. आचमन (तीन बार)


मंत्र बोलें—
ॐ केशवाय नमः
ॐ माधवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
फिर दाएँ अंगूठे से दो बार होंठ पोछें और हाथ धो लें।

४. प्राणायाम (तीन बार)

दाएँ नथुने से श्वास लें → रोकें → बाएँ से छोड़ें।
फिर बाएँ से लें → रोकें → दाएँ से छोड़ें।

५. दीप प्रज्वलन

दीपक को यह मंत्र बोलकर जलाएँ—
“ॐ ज्योत ज्योत महा ज्योत सकल ज्योत जगाये तुमको पूजे सकल संसार ज्योत माता तू ईश्वरी तू हमारी धरम की माता हम तेरे धरम के पूत” “ॐ ज्योति पुरूषाय धीमहि तन्नो ज्योत निरंजन प्रचोदयात”


६. दो अगरबत्ती लगाएँ

७. गुरुजी का पूजन करें

८. गणेश जी का पूजन करें

९. इष्ट देव का पूजन करें

१०. कुल देव का पूजन करें

११. पितरों का पूजन करें

१२. स्थान देव का पूजन करें

पूजन विधि (आवाहन एवं पूजन क्रम)

आवाहन मंत्र:
दाएँ हाथ में चावल और पानी लेकर मंत्र बोलें—
“अहम् त्वाम् (श्री गुरूभ्यो) आवाहनम् करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदम आसनम् समर्पियामि”
(कोष्टक में जिस देव/गुरु/देवी का आवाहन कर रहे हैं उसका नाम बोलें)
फिर चावल आसन पर छोड़ दें और हाथ से बैठने का संकेत करें।


देवताओं का क्रमवार पूजन

१. पैर धोने के लिए एक चम्मच पानी पात्र में डालें और कहें—
“हे महाराज मै आपके पैर धुल रहा हूँ।”

२. वस्त्र अर्पित करें—
इदम् वस्त्रम् समर्पियामि

३. चंदन—
इदम् चंदनम समर्पियामि

४. अक्षत—
इदम् अक्षतम् समर्पियामि

५. सुगंध/इत्र—
इदम् सुगन्धि समर्पियामि

धूप—
इदम् धूपम् गृहणयामि

दीप—
इदम् दीपम् दर्शयामि

नैवेद्य (मिठाई/बताशा)—
इदम् नैवेद्य निवैदयामि

जल—
इदम् जल समर्पियामि

इसी प्रकार गुरु, गणेश, इष्ट, कुलदेवता, पितर और स्थानदेव—सभी का क्रमवार पूजन करें।
सुबह और शाम—दोनों समय पंचोपचार पूजन करें।

पूजन विसर्जन विधि

जब पूजा पूर्ण हो जाए तो हाथ में थोड़े चावल लें और मंत्र बोलें—

“मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर
यत्पूजितं मया देवं परिपूर्ण तदस्तु मे
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्
पूजनं न जानामि क्षमस्व परमेश्वर ।।”

फिर बोलें—
“निज मन्दिरम् गच्छ गच्छ परमेश्वरा”
“निज मन्दिरम् गच्छ गच्छ परमेश्वरी”
(दो बार)

चावल जमीन पर छोड़ दें।
खड़े हो जाएँ और अपना आसन फोल्ड कर दें।