इस रोग का गलत प्रबंधन आपको जीवनभर के लिए बीमार और कमजोर बना सकता है

Dr. Jaibir Singh

टाइफॉइड एक गैस्ट्रोइंटेस्टिनल इंफेक्शन है, जो साल्मोनेला टाइफी (S.typhi) के कारण होता है। टाइफॉइड होने पर तेज बुखार, डायरिया और उल्टी मुख्य रूप से होता है। दूषित पानी या भोजन के जरिए इस बैक्टीरियल इंफेक्शन के होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। एस. टाइफी मुंह के जरिए आपकी आंतों में प्रवेश करके वहां लगभग एक से तीन सप्ताह तक रहता है। उसके बाद आंतों की दीवार के जरिए आपके रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाता है। खूने से ये टाइफॉइड बैक्टीरिया अन्य ऊतकों और अंगों में फैलकर कोशिकाओं के अंदर छिप जाता है, जिसका पता आपकी प्रतिरक्षा कोशिकाएं भी नहीं लगा पाती हैं। टाइफॉइड इलाज ना कराने से आपके लिए घातक हो सकता है। टाइफॉइड की संभावित जटिलताओं में किडनी फेलियर, गंभीर जीआई रक्तस्राव आदि शामिल हैं।

टाइफाइड बुखार छोटी आंत या बड़ी आंत की दीवारों में कोशिकाओं के मरने का कारण बन सकता है जिससे आंतों को स्थाई क्षति पहुंच सकती है

बुखार या ज्वर टाइफाईड का प्रमुख लक्षण है।

जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता जाता है वैसे-वैसे ही भूख कम हो जाती है।

टाइफाइड से ग्रसित को सिर दर्द होता है।

शरीर में वेदना होना। पैरों पिंडलियों जोड़ों में दर्द

ठण्ड की अनुभूति होना।

सुस्ती एवं आलस्य का अनुभव होना सर भारी रहना सिरदर्द।

कमजोरी का अनुभव होना खराब पाचन पेट भरा भरा सूजा हुआ रहना खाने में अरूचि होना

परहेज

कोई भी जटिल भोजन न करें मसालेदार तला हुआ मैदा से बनी हुई वस्तुएं ज्यादा मिर्च मसाले वाली वस्तुएं भूलकर भी न खाएं

भूख से थोड़ा कम और खूब चबा-चबाकर खाएं

सफाई और शुद्ध पानी का ध्यान रखें

थोड़े पानी में पुदीना लौंग सौंफ उबालकर रख लें पीते रहें

टाइफाइड जैसे रोग अक्सर डिहाइड्रेशन का कारण बनते हैं, इसलिए रोगी को कुछ-कुछ समय बाद तरल पदार्थ जैसे पानी, ताजे फल के रस, हर्बल चाय आदि का सेवन करें। उबला और उचित तरीके से उबला हुआ पानी पीएं। केवल उबला आहार लें और बाहरी खाने से परहेज करें।

उपचार :- ये हज़ारों लोगों को स्वास्थ्य प्रदान कर चुका उपाय है जो आंतों को स्वस्थ रखकर उपचार करता है जो सालों साल इस रोग से ग्रस्त थे

सुबह खाली पेट गिलोय, गेहुं ज्वारा और तुलसी का स्वरस 30 मिलीलीटर लें एक घंटा कुछ भी खाएं पिएं नहीं

खाने के बाद 10/10/10 मिलीलीटर कालमेघासव तथा एक एक आरोग्य वर्धिनी बटी व नीम घनवटी लें सुबह दोपहर शाम

4 अंजीर 8 मुनक्का और चने के दाने बराबर खूबकलां पाउडर कूटकर चटनी बना लें सुबह निराहार पांच दिन तक खिलाएं जिससे खाने से अरूची भरा हुआ पेट कलेजा पहले दिन से ही सुधार होगा

दिन में तीन बार एक चम्मच सौंफ छोटा टुकड़ा अदरक सात पत्ते पुदीना एक लौंग एक कप पानी में उबालकर पिलाएं ताकि पाचनतंत्र स्वच्छ हो एंजाइम बढ़े और हाइपर एसिडिटी नियंत्रण में रहे

गला खराब होने की स्थिति में दो दो खदिरादी बटी चूसनी है सुबह दोपहर शाम

रोग ठीक होने के उपरांत भी सात दिन कच्चे पपीते या अनानास का जूस अवश्य लें , या पका पीला अनानास और पपीता बदल बदल कर खाएं