कोरोना के पश्चात हर एक का शरीर लगभग अम्लीय, एंटी आक्सीडेंट से खाली और जीवन शक्ति रहित है

कारण साफ है शरीर का प्राकृतिक व्यवहार बदला है जीवन अंग कमजोर हैं फेफड़ों के कमजोर पड़ने से रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ रही है और किडनी कमजोर होने से एसिड और टाक्सिन दोनों सूरत घातक है

विश्व में हर चीज जोड़े से है अच्छा बुरा गर्म तो ठंडा गुड बैक्टीरिया बैड बैक्टीरिया अम्ल तो क्षार और शरीर अपने आप में विश्व है Body is mini World

शरीर में करोडों जीवित कोशिकाएं बैक्टीरिया स्पर्म एग उतना ही पानी जितना धरती पर उतनी धातुएँ उतने लवण सब उतनी गैसें और सब में ताल मेल आवश्यक है और इस तालमेल को बैठाता है शरीर में अम्ल और क्षार का संतुलन यानी बॉडी का पी एच लेवल जो म शरीर को स्वस्थ रहने के लिए संतुलन बनाए रखने होते हैं जैसे ब्लड प्रेशर, ऑस्मॉसिस, पानी, और मिनरल्स का संतुलन।

एक और महत्त्व संतुलन है एसिड और बेस अल्कली का संतुलन। एसिड-अल्कली का संतुलन शरीर में बेहद ज़रूरी है।

हमारे शरीर का सामान्य पीएच 7 से थोड़ा अधिक होना चाहिए अर्थात् थोड़े से अल्कलाइन वातावरण में हमारे सेल्स स्वस्थ रहकर अपना काम सही ढंग से करते हैं।

लेकिन आजकल हम सभी के शरीर में एसिड बढ़ता जा रहा है। एसिड की बढ़ी हुई इस अवस्था को मेटाबॉलिक एसिडोसिस कहते हैं।

कोशिकाओं के आसपास बढ़ते इस एसिड के कारण वह कैंसर सेल्स में बदल सकती हैं। यानी जो कोशिकाएं एसिडिटी के माहौल में जीना सीख जाती हैं वो कैंसर सेल्स में बदलने लगती हैं

ब्लड में जब एसिड की मात्रा बढ़ती है तो ये कई तरह के ब्लॉकेज उत्पन्न करता है जो कि लकवा,वेरीकोस वेन्स और हार्ट अटैक जैसी समस्याएं उत्पन्न करते है।

बढ़े हुए एसिड को नियंत्रित करके इन समस्याओं से बचा जा सकता

वातावरण में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइ ऑक्साइड का स्तर बढ़ना क्योंकि सांस लेने पर यह बढ़ी हुई कार्बन डाइ ऑक्साइड रक्त के पीएच को कम कर देती है।

शरीर से एसिड के उत्सर्जन का कार्य मुख्य रूप से फेफड़ों और किडनी का है, यदि यह दो अंग ठीक से काम नहीं करते हैं तो भी शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। अत: मेटाबॉलिक एसिडोसिस के उपचार के समय इन दोनो अंगों का खास ख्याल रखना चाहिए।

एसिड अधिक होने से अल्कलाइन मेटल्स जैसे पोटैशियम और मैग्नीशियम का स्तर खून में कम होना ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है।

एसिडिक वातावरण किडनी में स्टोन का निर्माण करता है, क्योंकि बढ़े हुए एसिड को कम करने के लिए उसे हड्डियों से कैल्शियम निकालना पड़ता है और यह कैल्शियम किडनी में जाकर जमा हो जाता है और पथरी या स्टोन्स बनाता है।

हड्डियों से कैल्शियम के निकलने से वे कमज़ोर हो जाती हैं और यह ऑस्टियोपोरोसिस नामक रोग उत्पन्न करती हैं।

एसिड बढ़ने से सेल्स जल्दी-जल्दी मरने लगते हैं, इसलिए बुढ़ापा शीघ्र आ जाता है।

बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं, झुर्रियां आने लगती हैं, इम्युनिटी कम होने लगती है और थकान भी जल्दी होने लगती है।

एसिड दांत , मसूड़ों की तकलीफ भी बढ़ाते हैं, जिससे वे जल्दी खराब होने लगते हैं।

दिमाग की क्रियाविधि प्रभावित होना

एसिड बढ़ने से आरबीसीएस की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता में कमी आ जाती है।

कम ऑक्सीजन मिलने से दिमाग अपने कार्यों को करने में दिन प्रतिदिन कमजोर होता चला जाता है।