तंत्र साधना का मार्ग अत्यंत व्यापक, गूढ़ और सूक्ष्म ऊर्जा विज्ञान पर आधारित होता है। यहाँ मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि चेतना के विशेष कंपनों को सक्रिय करने वाली ध्वनि-ऊर्जाएँ हैं, और प्रत्येक देवी–देवता का मंत्र अपने साथ एक विशिष्ट ऊर्जा-तत्त्व रखता है। काली, तारा, छिन्नमस्ता, भैरवी जैसी उग्र देवियाँ जहाँ साधक के भीतर स्थित…...

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लहरी मन्त्र साधना अर्थात एक लहर की तरह आगे बढने का चरण है जिसमे आपको अपने अक्ष से जुडी विडियो को जाग्रति करने का जरूरत होता है इस साधना पद्धति में सबसे पहले आपको अपने परिवेश को साधना है और आपको इसके अनंत लाभ प्राप्त होते है |आप चाहते है शक्तियों का दर्शन हो,आप चाहते है हर साधना में सफलता मिले आपके पास कर्जमुक्ति ,धन दौलत ,व्यापार वृद्धि, बीमारी इलाज जैसे बहुत सारे अलग अलग साधना करने का समय नही होता है ऐसे में केवल एक साधना लहरी होता है जिससे आपका जीवन पटरी पर लौट आता है |थोडा कठिन है ,समय लगता है शरीर तपना पड़ेगा श्रमसाध्य कार्य है लेकिन असम्भव नही है | इन सब विधा को तीन माह में पूर्ण करा जा सकता है अगर व्यक्ति दो घंटे रात्रि को और एक से दो घंटे सुबह दे दे तो |आप चाहे की आपको कुछ भी न करना पड़े और चमत्कार हो जाये तो संसार में बस भटकते रहिये और रोते रहिये लेकिन अगर आप चाहे कि जीवन बदल जाए तो आइये इस पथ पर आपका स्वागत है |

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तंत्र-शास्त्र में भैरव को चेतना के परम जाग्रत रूप,
“टाइम-ब्रेकर ऊर्जा”
और
“सर्व-विघ्न-नाशक तत्त्व”
का प्रतीक माना गया है।

भैरव साधना का मूल उद्देश्य किसी भी कार्य को बाहरी बल से सिद्ध करना नहीं, बल्कि साधक की एकाग्रता, साहस, और ऊर्जाओं के प्रवाह को इस स्तर तक उठाना है कि उसके लिए कठोर से कठोर परिस्थिति भी कार्य-पूरक बन जाए। इसीलिए इसे “सर्व-कार्य-सिद्धि” कहा गया है—क्योंकि साधक की चेतना इतनी तीक्ष्ण हो जाती है कि अवरोध स्वयं हटते चले जाते हैं।

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इस साधना को साधक घर पर कर सकते है बहुत ही पावरफुल अनमोल साधना है अभि के समय मे पूर्ण गुप्त लुप्त है और कभी भी यह साधना निष्फल नही जाता है विधि-दक्षिण मुख होकर साधक साधना आरंभ करे शनिवार से रात्रिकालीन 12 बजे से वस्त्र काला विना सिला हुआ धारन करे , आसन काला,आसन…...

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यह वह बहुमूल्य मंत्र है जिससे आप कोई भी भैरव का आवाहन कर सकते है सिद्ध विधिभैरव जी को सात्विक मे जागृत कर सकते है पंचमनी मिठाई,उड़द के बारा,चिलम अर्पण करेनित्य दिन दीपक प्रज्जवलित करे सरसो तेल मे काला हकीक माला जाप 3 माला नित्यकाला आसननिर्वस्त्र या विना सिला हुआ वस्त्र धारण करेदिशा दक्षिण मुख…...

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इस मंत्र का सवा लाख जप करने से अनेक पीढ़ियों से रूष्ट कुलदेवी भी खुश हो जाती है.विधि : एक लोटा जल पास में रखें , गूगल धुप और दीपक घी का जलाकर रखे करके कोई मीठा पकवान चढ़ाकर उत्तर मुखी होकर करना है. आसन वस्त्र वैसे तो लाल हो तो बेहतरीन लेकिन उपलब्ध न…...

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आज हर तीसरे साधक द्वारा यही संपर्क किआ जाता है कि धन की कमी है |पहली चीज तो ये समझिये की धन कमाने के लिए तन्त्र में आ रहे हो तो तुरंत लौट जाओ क्योंकि ये मार्ग बहुत लम्बा और कठिन है |इतना कठिन की यहाँ बस दिल ही दुखेगा आपका ,क्योंकि साधना वीरो का…...

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दिन –  सोमवार, शनिवार ,अमावस्या दिन जाप – 07 दिन समय – रात्रि 10 से वस्त्र –  सफेद आसन –  लाल माला –   रुद्राक्ष जाप –  21 माला दिशा – पूरब मुख पूजन – पंचोपचार कवच प्रयोग – नही पूजन – गुरु, गणेश, ईस्ट, पितर, कुलदेवता(नित्य का पूजन साधना से पहले अलग से कर लें )…...

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