परिचय — तांत्रिक सिद्धियों का वास्तविक स्वरूप तंत्र साधना का मार्ग अत्यंत व्यापक, गूढ़ और सूक्ष्म ऊर्जा विज्ञान पर आधारित होता है। यहाँ मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि चेतना के विशेष कंपनों को सक्रिय करने वाली ध्वनि-ऊर्जाएँ हैं, और प्रत्येक देवी–देवता का मंत्र अपने साथ एक विशिष्ट ऊर्जा-तत्त्व रखता है। काली, तारा, छिन्नमस्ता, भैरवी जैसी उग्र देवियाँ जहाँ साधक के भीतर स्थित…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
Tantra Dunia में दिव्य वस्तुए चितावर की लकड़ी, हत्था जोड़ी , काली तुम्बी जैसे अनेक वस्तुओ का विवरण है इसमें Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
लहरी साधना हर सिद्ध चरण की लहरी मन्त्र साधना अर्थात एक लहर की तरह आगे बढने का चरण है जिसमे आपको अपने अक्ष से जुडी विडियो को जाग्रति करने का जरूरत होता है इस साधना पद्धति में सबसे पहले आपको अपने परिवेश को साधना है और आपको इसके अनंत लाभ प्राप्त होते है |आप चाहते है शक्तियों का दर्शन हो,आप चाहते है हर साधना में सफलता मिले आपके पास कर्जमुक्ति ,धन दौलत ,व्यापार वृद्धि, बीमारी इलाज जैसे बहुत सारे अलग अलग साधना करने का समय नही होता है ऐसे में केवल एक साधना लहरी होता है जिससे आपका जीवन पटरी पर लौट आता है |थोडा कठिन है ,समय लगता है शरीर तपना पड़ेगा श्रमसाध्य कार्य है लेकिन असम्भव नही है | इन सब विधा को तीन माह में पूर्ण करा जा सकता है अगर व्यक्ति दो घंटे रात्रि को और एक से दो घंटे सुबह दे दे तो |आप चाहे की आपको कुछ भी न करना पड़े और चमत्कार हो जाये तो संसार में बस भटकते रहिये और रोते रहिये लेकिन अगर आप चाहे कि जीवन बदल जाए तो आइये इस पथ पर आपका स्वागत है | Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
भैरव-साधना (सर्व-कार्य-सिद्धि) मन्त्र तंत्र-शास्त्र में भैरव को चेतना के परम जाग्रत रूप, “टाइम-ब्रेकर ऊर्जा” और “सर्व-विघ्न-नाशक तत्त्व” का प्रतीक माना गया है। भैरव साधना का मूल उद्देश्य किसी भी कार्य को बाहरी बल से सिद्ध करना नहीं, बल्कि साधक की एकाग्रता, साहस, और ऊर्जाओं के प्रवाह को इस स्तर तक उठाना है कि उसके लिए कठोर से कठोर परिस्थिति भी कार्य-पूरक बन जाए। इसीलिए इसे “सर्व-कार्य-सिद्धि” कहा गया है—क्योंकि साधक की चेतना इतनी तीक्ष्ण हो जाती है कि अवरोध स्वयं हटते चले जाते हैं। Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
माता काली का प्रत्यक्ष दर्शन हेतु सात्विक साधना इस साधना को साधक घर पर कर सकते है बहुत ही पावरफुल अनमोल साधना है अभि के समय मे पूर्ण गुप्त लुप्त है और कभी भी यह साधना निष्फल नही जाता है विधि-दक्षिण मुख होकर साधक साधना आरंभ करे शनिवार से रात्रिकालीन 12 बजे से वस्त्र काला विना सिला हुआ धारन करे , आसन काला,आसन…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
बहुमूल्य परिक्षित बटुक भैरव प्रत्यक्षीकरण साधना यह वह बहुमूल्य मंत्र है जिससे आप कोई भी भैरव का आवाहन कर सकते है सिद्ध विधिभैरव जी को सात्विक मे जागृत कर सकते है पंचमनी मिठाई,उड़द के बारा,चिलम अर्पण करेनित्य दिन दीपक प्रज्जवलित करे सरसो तेल मे काला हकीक माला जाप 3 माला नित्यकाला आसननिर्वस्त्र या विना सिला हुआ वस्त्र धारण करेदिशा दक्षिण मुख…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
कुलदेवी की साधना का मन्त्र इस मंत्र का सवा लाख जप करने से अनेक पीढ़ियों से रूष्ट कुलदेवी भी खुश हो जाती है.विधि : एक लोटा जल पास में रखें , गूगल धुप और दीपक घी का जलाकर रखे करके कोई मीठा पकवान चढ़ाकर उत्तर मुखी होकर करना है. आसन वस्त्र वैसे तो लाल हो तो बेहतरीन लेकिन उपलब्ध न…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
महाशक्तिशाली लक्ष्मीजी मंत्र आज हर तीसरे साधक द्वारा यही संपर्क किआ जाता है कि धन की कमी है |पहली चीज तो ये समझिये की धन कमाने के लिए तन्त्र में आ रहे हो तो तुरंत लौट जाओ क्योंकि ये मार्ग बहुत लम्बा और कठिन है |इतना कठिन की यहाँ बस दिल ही दुखेगा आपका ,क्योंकि साधना वीरो का…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
कुल देवता की साधना दिन – सोमवार, शनिवार ,अमावस्या दिन जाप – 07 दिन समय – रात्रि 10 से वस्त्र – सफेद आसन – लाल माला – रुद्राक्ष जाप – 21 माला दिशा – पूरब मुख पूजन – पंचोपचार कवच प्रयोग – नही पूजन – गुरु, गणेश, ईस्ट, पितर, कुलदेवता(नित्य का पूजन साधना से पहले अलग से कर लें )…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here