गुरु मंत्र के दिव्य रहस्य हर किसी के सामने प्रकट नहीं किए जाते, क्योंकि यह मंत्र केवल शब्द नहीं, गुरु-कृपा का शुद्धतम स्वरूप होता है। सच्चा शिष्य वह है जो उठते-बैठते, चलते-फिरते, जागते-सोते हर क्षण गुरु मंत्र का जप करता रहता है। उसे कितना भी कठिन या असंभव कार्य क्यों न सौंप दिया जाए, वह…...

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ग्रहण वाले दिन माला जाप घी का दीपक व गूगल धूनी जलाकर करे पूर्व मुख रहेगा.पुरे ग्रहण जप करे.फिर मंगलवार को प्रात:काल स्नानकर व्रत रखें काठ(लकड़ी) की गदासामने रखकर (आसन पर) पूर्व की ओर मुंह कर बैठे औरप्रार्थना कर मंत्र जप 108 बार करें।फिर प्रतिदिन स्नानकर कम से कम । बार ये मंत्र जपे तंब… Read More


अंबुबाची के पवित्र काल में देवी-साधना की शक्ति कई गुना अधिक प्रभावी मानी जाती है। इस अवधि में किया गया मंत्र-जप, हवन या कोई भी तांत्रिक अनुष्ठान अत्यंत शुभ फल प्रदान करता है। विशेषतः जब अष्टमी का दिन शनिवार के साथ संयोजन में आता है, तब साधना की सिद्धि का योग और प्रबल हो जाता है। योग्य साधक इस शुभ मुहूर्त से अपनी 21 दिवसीय साधना का आरंभ कर सकता है। यदि चाहें, तो अन्य सामान्य दिनों में भी यह साधना पूर्ण प्रभाव के साथ की जा सकती है।… Read More


१. घर में पूजा करने वाला एक ही मूर्ति की पूजा नहीं करें। अनेक देवी-देवताओं की पूजा करें। घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश नहीं रखें।२. शालिग्राम की मूर्ति जितनी छोटी हो वह ज्यादा फलदायक है।३. कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी… Read More


ॐ एक नमक रमता माता दूसरा नमक विरह से आता। तीसरा नमक औरी बौरी चौथा नमक रहै कर जोरी यह नमक अमुक’ खाये अमुक’ को छोड़ दूसरा नहीं जाये । दुहाई पीर औलिया की जो कहे सो सुने जो माँगे सो देय दुहाई गौरा पार्वती की दुहाई कामाख्या देवी की दुहाई गुरु गोरखनाथ की ।।… Read More


शाबर मन्त्र साधना अत्यंत प्रभावशाली, सरल और सर्वसुलभ साधना पद्धति है। यह किसी भी जाति, वर्ण, आयु, लिंग या धर्म के व्यक्ति द्वारा की जा सकती है। शाबर मन्त्रों के प्रवर्तक स्वयं सिद्ध-साधक रहे हैं, इसीलिए इनकी साधना में गुरु की अनिवार्यता नहीं होती, परंतु यदि कोई अनुभवी और निष्ठावान गुरु मार्गदर्शन करे तो साधना में आने वाले विक्षेपों से सुरक्षा प्राप्त होती है। साधना के समय साधक को किसी भी रंग की धुली हुई धोती पहननी चाहिए और किसी भी रंग का कम्बल आसन के रूप में उपयोग कर सकता है। दीपक के रूप में घी या मीठे तेल का दीपक जलाकर रखना चाहिए, जब तक मन्त्र-जप चलता रहे। धूप या अगरबत्ती में किसी भी प्रकार का प्रयोग किया जा सकता है, किंतु गूग्गूल और लोबान की धूप विशेष रूप से प्रभावी मानी गई है। दिशा का कोई स्पष्ट उल्लेख न हो तो साधक को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके साधना …….… Read More


यह साधना विशेष रूप से सावन मास में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने हेतु की जाती है।इसे आप किसी भी सांसारिक इच्छा जैसे — धन, नौकरी, संतान, रोगमुक्ति, या साधना सिद्धि के लिए कर सकते हैं। यह पूर्णतः सिद्ध एवं अनुभव की हुई साधना है।सावन में जो भी साधक इसे श्रद्धा से करता है,… Read More


शिव धन प्रदाता स्तोत्र एक अत्यंत प्रभावशाली और दुर्लभ स्तोत्र है जो भगवान शिव के धनप्रदायक स्वरूप की स्तुति करता है। इसका नियमित पाठ साधक को: साधना का उद्देश्य यह स्वयं रचित और आजमाया हुआ स्तोत्र है।इसका प्रयोग सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति हेतु किया जाता है —जैसे धन प्राप्ति, वर प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति, नौकरी प्राप्ति… Read More


साधना/क्रिया विधान सारांश तालिका विषय विवरण दिन पितृपक्ष के 15 दिन समय सुबह 4 बजे वस्त्र सफेद (साफ और पवित्र) आसन सफेद भोग खीर, पूड़ी, सब्ज़ी, पानी दिशा दक्षिण मुख पूजन पितरों का आवाहन (मानसिक) कवच प्रयोग नहीं विशेष ध्यान मानसिक प्रार्थना और श्रद्धा बनाए रखें सावधानी / नियम… Read More


यह क्रिया अत्यंत शक्तिशाली और घातक है। इसे कभी भी बेवजह या किसी पैसों की लालच में प्रयोग न करें। इसका प्रयोग केवल अत्यंत आवश्यकता और सोच-समझकर ही किया जाना चाहिए। यदि इसका अनुचित प्रयोग किया गया तो यह सीधे लक्षित व्यक्ति और उसके परिवार पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। क्रिया के लिए आवश्यक… Read More