हर तरह की बंदिश खोलने की अमल हर तरह की बंदिश खोलने की अमल वह खास तांत्रिक क्रिया है जो व्यक्ति के जीवन में लगी सभी प्रकार की रुकावटें—चाहे वे रोजगार की बंदिश हो, प्रेम में अड़चन, विवाह रुकावट, धन का ठहराव, दुश्मनों द्वारा लगाई मनोकामना-बंदी, नज़र–बंदी या गुरुबंदी—सबको एक ही प्रयोग से काट देती है। यह अमल उन प्राचीन रहस्यमयी प्रक्रियाओं में से एक है जिसका प्रयोग केवल वही साधक कर पाता है जो जप–संकल्प में दृढ़ और मन से निडर होता है। अमल के प्रभाव से साधक के चारों ओर फैली अदृश्य गांठें खुलने लगती हैं, रास्ते साफ होते जाते हैं और जिस जीवन में वर्षों से रुकावट थी, उसमें अचानक से गति, कामयाबी और नई ऊर्जा का प्रवेश होने लगता है। यह अमल गुप्त जगत की उन शक्तियों को सक्रिय करता है जो बाधाएँ पैदा करने वाली नकारात्मकता को काटकर व्यक्ति को उसके स्वाभाविक भाग्य-पथ पर लौटाती हैं। सही विधि, सही समय और सही संकल्प के साथ किया गया यह अमल—हर बंद दरवाज़े को खोलने वाली कुंजी बन जाता है। Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
महाकाल भैरव कार्य सिद्धि प्रयोग यह प्रयोग विशेष रूप से कठिन, अटके हुए और लंबे समय से रुके कार्यों के लिए अत्यधिक फलदायी माना गया है। साधक यदि नियमपूर्वक इस सिद्ध प्रयोग को अपनाता है, तो उसकी मनोकामना शीघ्र सिद्ध होती है। महाकाल भैरव की कृपा से यह कार्यसिद्धि प्रयोग आज तक असफल नहीं गया है। Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
मसाण कितने प्रकार के होते है ? पाँचों मसाणों की साधना अत्यंत कठिन, दुर्लभ और खतरनाक मानी जाती है—इन्हें हर कोई नहीं कर सकता। आजकल अधिकतर लोग इनके नाम पर पाखंड फैलाते हैं, जबकि वास्तविक साधक अत्यंत कम और गुप्त होते हैं; क्योंकि तंत्र की ये क्रियाएँ छिपे अभ्यास और सच्ची साधना की माँग करती हैं, दिखावे की नहीं। Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
भैरवी साधना के लिए उपयुक्त आयु वर्ग तंत्र साधना सामान्य वैदिक, दक्षिणमार्गी या योग साधना से बिल्कुल अलग दिशा में कार्य करती है। यह मार्ग शरीर को ही अस्त्र बनाकर उसकी ऊर्जा को नियंत्रित और उपयोग करता है।तंत्र में वाममार्ग, कुंडलिनी जागरण और विशेष रूप से भैरवी विद्या महत्वपूर्ण स्थान रखती है—हालाँकि यह मार्ग अक्सर विवादास्पद माना जाता है, लेकिन इसके सूत्र…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
भैरवी विद्या सफलता सूत्र भैरवी विद्या शैव दर्शन पर आधारित एक अत्यंत गूढ़ विद्या है। इसका मानना है कि जन्म-जन्मान्तरों से जो चेतना, संस्कार और ऊर्जा हमारे भीतर विकसित होकर एक पूर्ण शरीर प्रदान करते हैं, वह सदाशिव का वरदान है। मानव-शरीर एक ऐसा यंत्र है जिसकी शक्तियाँ असीमित हैं।जब साधक इस यंत्र की ऊर्जा-धारा को समझकर उसे अधिक…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
।। सूतक–पातक निर्णय ।। हिन्दू धर्म में सूतक और पातक दो महत्वपूर्ण परंपराएँ मानी जाती हैं।जब किसी परिवार में जन्म या मृत्यु होती है, तो उससे उत्पन्न होने वाली अशुद्धि के कारण संबंधित परिवार में सूतक मान लिया जाता है।मृतक के रक्त-संबंध वाले सभी परिजनों के घर में यह सूतक लागू होता है। नीचे इस विषय में संक्षिप्त और…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
राहु और केतु — कलियुग की दो चरम शक्तियाँ कलियुग में राजा राहु को माना गया है। राहु की विशेषता यह है कि उसकी इच्छाएँ असीमित होती हैं—ऐसी इच्छाएँ जो कभी पूरी नहीं हो सकतीं। यही अधूरी इच्छाएँ मनुष्य के जीवन में दुःख का मूल कारण बनती हैं।राहु का पेट कभी नहीं भरता, क्योंकि राहु का पेट होता ही नहीं—ऊर्जा का यह ग्रह केवल…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
श्मशान साधना — तंत्र का अत्यंत प्रभावी मार्ग तंत्र-जगत में श्मशान साधना एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रभावशाली साधना मानी जाती है। यह कोई साधारण पद्धति नहीं, बल्कि ऐसी साधना है जिसके द्वारा साधक बहुत शीघ्र और अत्यंत शक्तिशाली सिद्धियाँ प्राप्त कर लेता है। समाज में इसके बारे में कई भ्रांतियाँ फैली हुई हैं, परंतु वस्तुतः यह भी प्रकृति-शक्ति की एक विशिष्ट साधना है—न…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
भैरवी-चक्र साधना योनि-पूजन हर स्त्री का शरीर स्वयं में एक दिव्य योनि–पीठ है, जिसके बाएँ कोण में ज्ञान-शक्ति, दाएँ कोण में इच्छा-शक्ति, और नीचे के कोण में क्रिया-शक्ति प्रतिष्ठित मानी गई है। तांत्रिक परंपराओं में इसे ही कुंडलिनी ऊर्जा का केंद्र कहा गया है। वेदों में भी स्त्री को पुरुष का भाग्य और ऊर्जा-स्रोत माना गया है, क्योंकि…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
क्या कोई महिला किसी को गुरु बना सकती है या गुरु बन सकती है ? यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि भगवान बुद्ध ने बहुत समय तक महिलाओं को दीक्षा नहीं दी थी लेकिन महाप्रजापती गौतमी के कारण उन्होंने महिलाओं को भी दीक्षा दी थी। जैन धर्म में भी बहुत समय तक महिलाओं को साध्वी नहीं बनाया जाता था लेकिन महावीर स्वामी के काल में नरेश दधिवाहन की…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here