इस मंत्र का 11 बार जाप करके आसन पर बैठते ही, शूद्र-शक्तियाँ, भूत-प्रेत, बाधाएँ और छोटी-मोटी दैविक शक्तियाँ साधना में व्यवधान नहीं डाल पातीं; साथ ही किसी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव साधक पर नहीं होता। यह मंत्र सरल है—साधक इसे स्मरण कर लें और हर साधना से पूर्व आसन बिछाते समय इसका जाप अवश्य करें।

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अघोर साधना:- यह साधना कृष्ण पक्ष की अमावस्या ,शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को की जाती है और यदि इस दिन शनिवार,मंगलवार हो तो अति उत्तम रहता है। यह तीन प्रकार से की जाती है। शव साधना:-शव साधना में 30-35 वर्ष के व्यक्ति का शव होना चाहिए।और चंडाल या अकाल मृत्यु को प्राप्त हुये व्यक्ति के…...

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✅ वशीकरण सिद्धि – लोगों के मन को आकर्षित करने और अपने पक्ष में करने में सहायक।
✅ व्यापार व धन वृद्धि – व्यवसाय में उन्नति और आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मददगार।
✅ कर्ज मुक्ति – ऋण से मुक्ति के उपाय के रूप में प्रभावी।
✅ शत्रु निवारण – विरोधियों की योजनाएँ निष्फल करता है।
✅ अवरोध दूर करना – कार्यों में आ रही रुकावटें हटाने में सहायक।
✅ मान-सम्मान में वृद्धि – सामाजिक और पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ाता है।
✅ संबंधों में सुधार – बिगड़े रिश्तों को मधुर बनाने में मददगार।

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“विकट वशीकरण” तंत्र की वह धारा है जिसका प्रयोग साधारण वशीकरण से कहीं अधिक जटिल और गंभीर परिस्थितियों में वर्णित मिलता है। यह विधा किसी व्यक्ति पर बलात् प्रभाव डालने से अधिक, अव्यवस्थित ऊर्जाओं और प्रतिकूल शक्तियों को नियंत्रित करने के सिद्धांत पर आधारित है। तांत्रिक आचार्यों के अनुसार विकट वशीकरण तब किया जाता है जब सामान्य मंत्र, शांति-कर्म या ग्रह-सौम्यता से समस्या शांत न हो। इसमें साधक की मानसिक दृढ़ता, ऊर्जात्मक क्षमता और दीर्घकालीन तपस्या की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

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गायत्री मंत्र वेदों का हृदय, ऋषियों का शुद्धतम ज्ञान और सनातन धर्म की सर्वोच्च प्रार्थना माना गया है। यह मंत्र केवल देव-उपासना नहीं, बल्कि चेतना के पूर्ण जागरण का सूत्र है। ऋग्वेद में प्रकट यह दिव्य महामंत्र मन, प्राण और आत्मा की तीनों शक्तियों को पवित्र कर साधक को तेज, बुद्धि और धारणा प्रदान करता… Read More


मंत्र प्रयोग से पहले उसका विधिवत सिद्ध होना अनिवार्य माना गया है, और इस सिद्धि की शास्त्रीय प्रक्रिया को “मंत्र पुरश्चरण” कहा जाता है। पुरश्चरण पाँच मुख्य अंगों से मिलकर बनता है—जाप, हवन, अर्पण, तर्पण और मार्जन। इन क्रियाओं के माध्यम से मंत्र जाग्रत होकर पूर्ण रूप से सिद्ध होता है

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पाँचों मसाणों की साधना अत्यंत कठिन, दुर्लभ और खतरनाक मानी जाती है—इन्हें हर कोई नहीं कर सकता। आजकल अधिकतर लोग इनके नाम पर पाखंड फैलाते हैं, जबकि वास्तविक साधक अत्यंत कम और गुप्त होते हैं; क्योंकि तंत्र की ये क्रियाएँ छिपे अभ्यास और सच्ची साधना की माँग करती हैं, दिखावे की नहीं।

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महायोनि पूजा तंत्रमार्ग के उन प्राचीन और गूढ़ रहस्यों में से एक है, जिसे दक्षिणाचार, वामाचार, अघोराचार और कौलाचार जैसी अनेक गुरुपरंपराओं और उपासना-विधानों के माध्यम से समझा जाता है। दुर्भाग्य से आधे-अधूरे ज्ञान वाले नकली गुरुओं और कूपमंडूक संप्रदायों ने इस महान मार्ग को भ्रमों से भर दिया है, जबकि तंत्र को वास्तविक रूप… Read More


वैदिक परंपरा में प्रत्येक ग्रह एक विशिष्ट इष्ट देवता से जुड़ा हुआ है—सूर्य के इष्ट विष्णु, सोम के शिव, मंगल के दुर्गा, बुध के गणेश, गुरु के लक्ष्मी-नारायण, शुक्र के अघोर रुद्र, शनि के हनुमान, राहु के काल भैरव और केतु के रुद्र बताए गए हैं। साधक यदि इन इष्ट देवताओं को प्रसन्न कर ले,…...

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गुरु मंत्र के दिव्य रहस्य हर किसी के सामने प्रकट नहीं किए जाते, क्योंकि यह मंत्र केवल शब्द नहीं, गुरु-कृपा का शुद्धतम स्वरूप होता है। सच्चा शिष्य वह है जो उठते-बैठते, चलते-फिरते, जागते-सोते हर क्षण गुरु मंत्र का जप करता रहता है। उसे कितना भी कठिन या असंभव कार्य क्यों न सौंप दिया जाए, वह…...

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