• अद्भुत मन्त्र

ये मन्त्र सुरक्षा भी करता है और अभिचार करने बाले के ऊपर वापिस अटैक भी करता है अनेकों लोगों का अनुभूत है

इस मन्त्र का 12500 जप से सिद्ध हो जाता है सामने एक छुरी रखें उस पर हनुमान सिंदूर लगाएं गणेश जी के मंन्त्र की एक माला जप करें जल फूल चावल सिंदूर और बतासे रखें दिशा पूर्व माला रुद्राक्ष, छुरी पर ही पूजन होगा

बाद में जल बिभूति धूप लौंग इलायची धागा बना कर दे सकते हैं हर तरह के अभिचार को नष्ट करता है

मन्त्र

हनुमान अड़े भैरों लड़े काली करे प्रहार
कहे मच्छेन्दर दुष्ट का खाली जाए बार
महादेव की फिरे दुहाई

खुद कमाओ खुद खाओ
लोग प्रश्न करते है कि हमारे घर में कोई तन्त्र सम्बन्धी समस्या है बहुत से तांत्रिक आये लेकिन ठीक नहीं कर पाए।
मूल रूप से देखा जाए तो ये आपके ही कर्मों का खेल है जो आप को भुगतना पड़ रहा है।यानी आपका ही कर्ज है जो आपको ही भरना होगा। आज ऐसे ही लोगों के लिए भगवती का एक मंन्त्र दे रहा हूँ अगर पूरी श्रद्धा से करेंगे तो बहुत जल्दी आराम मिलेगा

ओम आदेस गुरु जी को आदेस
जे भुज ते महिषासुर मारो शुम्भ निशुम्भ हत्यो वलथम्बा आरत हेत पुकारत हूँ जाई कहाँ बैठी जगदम्बा खड्ग टूटो या खप्पर फूटो या होउहै कि रानी कि बुढ़िया छुतानी कि सिंह बुढानी कि ध्यान धरे शिव को जपती हो ।संकट में हम तोहि पुकारत वेर भई जगदम्ब विलम्ब क्यों करती हो।नवकोटी में तू ही भवानी तीन लोक में डंका बाजे ।महिमा अमित न जाये बखानी लांगुर बीर गहे अगवानी जय जय जगदम्ब भवानी अन्नपूर्णा हे जगपाली चन्ड मुंड को मार गिराया रक्तवीज का किया संहारा जय हंकारमती जय सँहारमति पहाड़ी देव जीरिया बंगालन वुद्ध उस्ताद बंगाले कि जादू एक कडी जादू की छोड़ बंगाले की जुवान पर बैठ खोल पलक देख दुनिया की झलक नीचे पृथ्वी ऊपर आसमान पंच परमेश्वर एक सामान दोहाई कामख्या देवी की दुहाई इस्माइल जोगी जीरिया बंगालिन नैना जोगन लोना चमारिन की।


धूप ज्योति जला कर इस मंन्त्र का जप करें
1000 बार जप करके सिद्ध कर लें।एक माला रोज करेंगे तो11 दिन में51 बार करेंगे तो21 दिन में हो जाएगा।
अगर सम्भव हो तो अपने सामने धूनी रख लें वह भी अभिमन्त्रित हो जाएगी।इसे प्रयोग करने से हर तरह का तन्त्र प्रयोग खत्म हो जाता है


इस मंन्त्र का जप 1000 बार करें 11 ।21 दिन में पूरा कर सकते है। हनुमान जी के लिए रोट भैरव जी के लिए दही बड़ा का भोग देना होगा। मंगल या शनि बार से शुरू कर सकते है दिशा पूर्व या उत्तर माला रुद्राक्ष। सामने जल फूल चावल सिंदूर और छुरी रखें उस पर सिंदूर लगाएं। बाद मेँ जल छिड़कने को दीजिये बन्धन खुल जायेगा बाकी बन्धन खोलने का कोई भी माध्यम हो सकता है रेत भी फूल भी मिट्टी भी ।

     

ओम लक्षलाभ युताय ऋद्धि सिद्धि सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः

इस मंत्र का सवा लाख जप कीजिये हवन कीजिये तर्पण मार्जन कीजिये सवा लाख पर जागृत हो जाता है।
पांच लाख जप होने पर धन की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाती है। बाकी सबका अपना अपना खाता है एक व्यक्ति ने सिर्फ 31000 ही किया बाद में कभी धन की कमी ही नहीं हुई।

ओम वं वटुक हनुमते नमः

इस मन्त्र का सवा लाख जप करके बच्चों को प्रसाद बांटना चाहिये इससे खुश हो कर हनुमान जी साधक की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं

सट्टा साधना का मन्त्र

ओम आदेश गुरु जी को आदेस
शिव के दरबार में कुबेर खड़ा, उसके हाथ में सोने का घड़ा ।
खोल घड़ा दे दड़ा । दड़े सट्टे के नम्बर की आबाज दे न देबे तो संतोषनाथ की आन।
शब्द साँचा पिंड कांचा चले मन्त्र इश्वरोवाचा ।

बिधि :  – इस मन्त्र की तीन घंटे जप 41 दिन तक उत्तर की तरफ मुँह करके रात दस बजे के बाद करें । दीपक घी का लगाएं उसने गुलाब इतर की कुछ बूंद डालें। २ इलायची दीपक में डालें।
गोरखनाथ जी की पूजा देवें,धूप दीप करें गुगल धूप,घी का दीपक रहेगा,लौंग बताशा,लड्डू का भोग लगाएं।
संतोष नाथ व शिव की पूजा देवें।
बिशेष सावधानी इस  दौरान जो भी अनुभव हों गुप्त रखें इस दौरान मिले नम्बर न लगाएं न ही किसी को बताएं। बाकी ये बहुत ही मायावी बिद्या है अगर आप खुद पैसा कमाना चाहते हैं तो सट्टे के नंबर खुद ही लगाएं लोगों को न बताएं नहीं तो लोगों को नम्बर आ जायेगा आप का नहीं आएगा

नीम और बकायन के बीजों को अच्छी तरह से बारीक पीस लें और500 ग्राम बकरी के दूध में एलवां मुसब्बर को घोल कर रख लें ।
फिर नीम के बीज और बकायन के बीजों के चूर्ण को इसमें मिला दें सब को मिला कर इसे अच्छी तरह से घोटें घोटते हुए जब ये गाड़ा हो जाएगा तो इसकी आधे आधे ग्राम की गोलियां बना कर इसे अच्छी तरह सूखा लें। फिर महामृत्युंजय मंत्र को जपते हुए इन गोलियों को अभिमंत्रित कर लें ।
कैसी भी पुरानी बबासीर हो कुछ दिन नियमित एक गोली ठंडे पानी से बिना कुछ खाये लें उसके बाद एक घण्टा कुछ न खाएं।
मिर्च मसाला आलू गोभी बैंगन और खटाई न खाएं । हर रोज गणेश भगवान को दूर्वा चढ़ाएं और उनसे इस रोग की निवृति के लिए प्रार्थना करें।

वशीकरण साधना
प्रकृति के राज्य में सब कुछ क्रिया और प्रतिक्रिया का ही खेल है पहले दो फिर लो यहाँ आपकी इच्छा का कोई महत्व नहीं है। अगर आप आवश्यक ऊर्जा प्रकट कर सकते हैं तो आप का कार्य हो जाएगा इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर आप नाचना चाहते हैं तो उसके लिए मन में पहले बैसी तरंगें बननी चाहिये अगर आप के मन में नाचने के योग्य तरंगे बन गयी तो आप बीच चौराहे पर मोटरसाइकिल की आबाज पर भी नाच सकते हैं ऐसे ही हंसने के लिए भी मन में बैसी ही तरंगें बननी चाहिए आप ऐसे स्थान पर दिल खोल कर नहीं हंस सकते जहाँ पर बहुत से लोग गमगीन हों या कुछ लोग रो रहे हों इसी तरह रोने के लिए भी भी बैसी ही ऊर्जा चाहिय। हमारे एक बुजुर्ग मित्र थे उन्होंने17 बार वशीकरण की साधना की लेकिन असफल रहे लेकिन जब उन्होंने18बीं बार साधना की तो सफल हुए उसके बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिली शादी की और परिबार बढ़ा यूं तो ये बात एक अतिश्योक्ति ही लगती है लेकिन ये एक सच्चाई है अगर आप वशीकरण करना चाहते हैं तो उसके लिए साधना का जो लेबल होना चाहिये वह जब तक पूरा नहीं होगा आप सफल नहीं होंगे।भगवती का कोई साधक बिना मंन्त्र के भी वशीकरण कर सकता है जबकी आम आदमी को साधना करने के लिए सालों साल लगेंगे।
इसमें दो मंन्त्र हैं
ओम गुरु जी आदेश
काली काली महाकाली ब्रह्मा की बेटी इंद्र की साली दोनों हाथ बजाबे ताली सोने की सँगली रुपे की कड़ी जहाँ पुकारू वहां माता काली हाजिर खड़ी शव्द साँचा पिंड कांचा चले मंन्त्र ईश्वरोबाचा।

इस मंन्त्र का12500 जप करके सिद्ध कर लें फिर ही वशीकरण मंन्त्र का प्रयोग सफल होगा
वशीकरण मंन्त्र
मारुए देश च बसदी काली। महाकाली संग में रहंदी गरियाँ खांदी छुहारेयाँ खांदी खुहें पन्यांदें बसदी काली माई उच्चेयाँ पिपलें बासा तेरा मालतिया देयां बुटेयाँ वसदा नाहरसिंह बीर मेरा संग बसदी काली माई भूमक तेरिया बीनी अमुकी को जगाबे बैठी को उठाबे तुरत हमारी सेज पर लाबे ना लावे तो फूट काकडी कलेजा मर जाये मेरी भगति गुरु की शक्ति चले मंन्त्र ईश्वरोबाचा।
पीपल के नीचे काली और नाहरसिंह की पूजा करे उन्हें निमंत्रण दे कि मैं सेवा करना चाहता हूँ फिर मंगल बार से शुरू करे। 21 दिन की साधना है उतर दिशा घी में इत्र मिला कर ज्योति जलाएं अपनी झोली में इत्र गरी खोपरा छुहारे लौंग इलायची हनुमानजी का सिंदूर रखें सामने जल फूल धूप दीप शक्कर।गुड़ गरी छुहारे इत्र सिंदूर रखें 21 दिन तक रात्रि के समय जप करें। फिर साध्य को गरी या छुहारा खाने को देने से या इत्र की एक बून्द लगा देने से वशीकरण होता है लेकिन ये प्रयोग अति आवश्यक होने पर ही करें नहीं तो माता काली के क्रोध का भी शिकार होना पड़ेगा

ओम नमो शिवाय सुबन्धनबिमोचनाय स्वाहा


ओम ह्रीं भैरव भैरव महाभैरव काल बिकराल भैरवाय दस दिशो रक्ष रक्ष हुं फट
इसका12500 जप करके सिद्ध कर लें जरूरत के समय अपने हाथ को अपने सिर के ऊपर से घुमा कर तीन बार चुटकी बजाने से हर तरह से रक्षा होती है ।
ओम ह्रीं भैरव भैरव महाभैरव काल विकराल भैरव दश दिशा बन्ध बन्ध हुं फट इससे तांबे की कील अभिमंत्रित करके घर मकान के चारों तरफ गाड़ देने से मकान की सुरक्षा होती है इसे भी उपरोक्त बिधान से ही सिद्ध किया जाता है । बहुत ही शक्तिशाली मन्त्र है

ओम नमः परमात्मने परब्रह्म मम शरीरं पाहि पाहि कुरु कुरु स्वाहा
इस मन्त्र को12500 जप करके सिद्ध कर लें फिर किसी को भी जल या बिभूति बना कर देने से हर तरह के रोग में लाभ होता है अनुभूत है

इस मन्त्र को चण्डी पत्रिका में पण्डित कृष्णानंद जी मिश्र वैद्य ककरा दुवाबल प्रयागराज बालों ने भी छपबाया था उसके बाद यही मन्त्र एक महात्मा जी ने भी बताया था इसका प्रयोग कई बार किया जो पूरी तरह सफल रहा

चंदा खोलूं सूरज खोलूं
खोलूं गंगा माई तैंतीस कोटि के देवता खोलूं हनुमंत को राम दुहाई कुल के सब पितर खोलूं कुल के देवी देवता खोलूं स्थान मकान का बन्धन खोलूं ।।।।।।।।
मन चाहे लड्डू खाऊं पूजा करूँ गणेश की जहां मन चाहे वहाँ जाऊं हनुमान जी को राम दुहाई सीता माता की आन ।


इस मन्त्र को हनुमान जी के मंदिर में बैठ कर 1000 बार जप कर सिद्ध कर लें। फिर जल छिड़कने से सब बन्धन खुल जाते हैं लेकिन बिना मतलब का पंगा भी न लें अपने लिए ही प्रयोग करें ।
।।।।।।। इस स्थान पर आप चाहें तो किसी दूसरे बन्धन का नाम ले कर उसे भी खोल सकते हैं
जैसे बनज व्यापार कोई बन्धी हुई मशीन आदि

बैसे तो नजर और टोक को लोग अंध विश्वास ही कहते हैं लेकिन ये सच में ही होता है ।एक भूखी कुतिया कुछ खाने के लिए मेरे पीछे पीछे चल रही थी मैंने उसे भगाने की कोशिश की तो वह जमीन पर लेट गई लेकिन भागी नहीं ।मैं एक दुकान में गया वहां से रस का पैकेट लिया और उसे डालने के लिये खोलने लगा तो वहां उपस्थित एक औरत कहने लगी कि ऐसे रस गरीब आदमी को भी नहीं मिलते हैं और आप कुत्तों को डाल रहे हैं मैंने कहा कि जो जिसकी किस्मत में होता है वही उसको मिलता है।आश्चर्य इस बात का था कि उसने वह रस नहीं खाए बाद में उसे पिछले दिन की रोटी डाली तो उसने वह खा ली। उसके बाद तीन चार कुत्ते वहां आये लेकिन किसी ने भी वह रस नहीं खाये सभी ने वह रस सूंघ कर छोड़ दिये यानी उन्हें उस रस में नजर।टोक का अहसास हो गया।
जबकि इंसान इस बात को नहीं जान पाता है


ओम नमो आदेस गुरु को उल्टन्त गोरख पलटन्त काया भाग भाग जमदूत गोरखनाथ आया लोहे की कोठड़ी बज्र की ताली आगे मेरे हरि बसे पाछे देव अनन्त रक्षा है गोरखनाथ की चौकी है हनुमंत शव्द साँचा पिंड कांचा चले मन्त्र ईश्वरोवाचा

बिधि ग्रहण होली दिवाली या किसी भी शुभ महूर्त में1000 बार जप करके सिद्ध कर लें बाद में मोरपंख या चाकू से झाड़ें अगर बहुत अधिक हालत खराब हो तो झाड़ू से झाड़ें चमत्कारिक ढंग से लाभ होगा फायदा होने के बाद गोरखनाथ जी और हनुमान जी के नाम से प्रसाद बांटें ।


काला भैरों कपिले केश कानों कुंडल भागों भेष हत्थ खप्पर जटाधारी माता काली के पूत मारे चार कुंठ के भूत गजता आवे बजता जावे अगर मेरे सिर के ऊपर आये संकट को कैद न करे तो माता काली की बतीस धारा हराम कर चले मन्त्र फुरे वाचा देखां तेरे इल्म का तमाशा


बिधि इस मन्त्र का एक हजार जप करके सिद्ध कर लें। इससे रोगी के सिर से मीठा रोट उतार कर पानी के पास या किसी चौराहे पर रख दें ।

भैरव जी

बहुत कम लोग भैरव जी के बारे में जानते हैं मूल रूप से भैरव जी समस्त धर्मस्थानों की ऊर्जा के संरक्षक हैं 52 शक्तिपीठ और12 ज्योतिर्लिंग के संरक्षक ही मुख्य 64 भैरव हैं बैसे तो भैरव की मुख्य चार श्रेणियां हैं बटुक भैरव कालभैरव भूत भैरव और महाभैरव जिन्हें स्वर्णाकर्षण भैरव भी कहा जाता है । ब्रह्मा और बिष्णु के झगड़े में मध्यस्थ के रूप में ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव प्रकट हुए थे जब ब्रह्मा ने झूठ बोला तो भगवान शंकर के तीसरे नेत्र से भैरव जी प्रकट हुए थे जिन्होंने ब्रह्मा के पंचम सिर को काट दिया था यानी भैरव जी ने ब्रह्मा जी से पंचम वेद को ही छीन लिया था जिसे वह ले कर तीनों लोगों में घूमे थे और काशी में किसी महापुरुष को वह पंचम वेद प्रदान कर दिया था ।बैसे तो हर वह व्यक्ति जो भगवती और शिव की साधना गुरु आदेस से करते हैं उनको भैरव जी अवश्य ही गुप्त रूप से सहायता करते हैं यानी गुरु शिव और शक्ति तीनों की ऊर्जा के संरक्षक भैरव जी हैं भैरव ही एक मात्र ऐसे देवता हैं जो साधक के पूर्ण रूप से बफादार और हितैषी हैं। परन्तु वह कभी भी मर्यादा का उलंघ्न सहन नहीं करते हैं। जैसे ही साधक किसी भी तरह से मर्यादा का उलंघ्न करते हैं तो भैरव जी उसे चेतावनी देते हैं जो भी चेतावनी को नजर अंदाज करेगा उसे भैरव जी अवश्य दंडित भी करते हैं ।

बटुक भैरव का शावर मन्त्र

बटुक भैरव बालक भेष ।भगवान भेष
सब आपद को काल भक्त जन हठ को पाल
कर धरे सिर कपाल दूजे करवाल ।
त्रिशक्ति देवी को वाल
भक्तजन मानस को भाल
तैतीस कोटि मन्त्र को जाल

प्रत्यक्ष बटुक भैरव जानिए

मेरी भगति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा ।

इस मन्त्र का12500 जप करें उड़द के बड़ों का भोग लगाएं गूगल का धूप दें चौमुखा सरसो के तेल का दीपक जलाएं । बटुक भैरव जी की कृपा प्राप्त होती है। फिर हर तरह से सहायता करते हैं।


बंधे हुए कारोबार खोलने का शावर मन्त्र

आज के जमाने में लोगों के मन में इर्ष्या द्वेष हद से ज्यादा बढ़ चुकी है लोग प्रायः ही चलते व्यापार को तन्त्र मंन्त्र प्रयोग द्वारा ठप कर देते हैं इस प्रयोग की एक बड़ी अजीब बात है कि ये बुरा करने का मंन्त्र जिससे कि व्यापार बन्धन होता है वह बिना कोई साधना किये भी पूरा काम करता है और जिसके ऊपर ये प्रयोग किया जाता है वह बहुत बड़ी आर्थिक परेशानी में फंस जाता है खर्चे बढ़ते जाते हैं और आमदनी बहुत कम हो जाती है ।

इस सब से बचाब के लिए ये मंन्त्र है

ओम गुरु जी आदेस सत नमो आदेस

ओम गुरु जी जल खोलूँ जल बायु खोलूँ खोलूँ जल का वीर ऊपर खोले कपिला भैरों

हेठ हनमन्त बीर लोहा लोहार खोलूँ बंधी नाव पतवार खोलूँ ।

बंधा हुआ कारोबार खोलूँ रूठी लक्ष्मी को में मनाऊं लक्ष्मी माई को

घर में लाऊं खीर पुए के भोग लगाऊं
काम चले व्यापार बढ़े।बढ़े धन का भंडार
नहीं तो आदिनाथ महादेव की आन
शव्द साँचा पिंड कांचा चले मंन्त्र ईश्वरोवाचा

बिधि गणेश लक्ष्मी सरस्वती की फ़ोटो बाजोट पर रखें पहले बाजोट पर लाल वस्त्र बिछा लें जल धूप दीप फूल चाबल इतर और खीर पुए का भोग रखें इस मंन्त्र का11 माला जप करें मंन्त्र जागृत हो जाएगा
पूर्ण सिद्धि के लिए12500 जप का बिधान है । सुबह दिन चढ़ने से पहले उठें घर में झाड़ू लगाएं उस कूड़े को घर से दूर फेंक आबे आती बार जल ले आएं फिर मंन्त्र पढ़ते हुए जल का छिडक़ाब करें फिर स्नान करके मंन्त्र जप करें
नोट कोई भी व्यक्ति इस मंन्त्र को किसी का व्यापार बन्धन के लिए प्रयोग न करें इसका दुष्प्रभाव उसके पूरे परिबार को भुगतना पड़ेगा

धागा अभिमंत्रित बिधान
आज के जमाने में हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से पीड़ित है इसलिये वह मजबूरी बश किसी गुणी व्यक्ति के पास जाते हैं वह उसे कोई धागा या यन्त्र बना कर देते हैं कोई बिभूति या जल भी बना कर देते हैं इस में नाम मात्र का ही खर्चा होता है लेकिन आज के लालची लोग हजारो रुपये ले लेते हैं यही नहीं इन्हें बनाने में भी कोई यम नियम का पालन नहीं किया जाता है जिससे इससे पीड़ित को कोई लाभ नहीं होता है । जिससे व्यक्ति तन्त्र मंन्त्र को ही ढोंग कह देता है।
सर्व प्रथम आप स्नान करके अपना नित्य संध्या बन्दन कीजिये फिर काला पीला लाल या सफेद रंग का धागा ले कर उस पर मंन्त्र पढ़ते हुए गांठ लगाइए सात बार मंन्त्र पढ़ कर सात गांठ लगाइए फिर धागे को सामने रख कर इस पर एक माला मंन्त्र जप करिये । अगर व्यक्ति मांस मछली का सेवन करता हो तो काले रंग का धागा बनाइये । आदमी अगर मांस मछली अंडा शराब का प्रयोग न करता हो तो पीला लाल या सफेद रंग का धागा बना सकते हैं । जिस व्यक्ति को कमजोरी का अनुभव होता हो आलस रहता हो तो उसे लाल रंग का धागा बनाइये । विद्यार्थियों के लिए पीले रंग का धागा बनाइये और क्रोधि व्यक्ति के लिए सफेद रंग का धागा बनाइये । धागा बनाने के लिए आप किसी भी रक्षा कारक मंन्त्र का प्रयोग कर सकते हैं अथवा

ओम गुरु जी आदेस सत नमो आदेस
सौ मण लोहे का कोठा जिसमें पिंड हमारा पैठा ईश्वर कुंजी ब्रह्मा ताला जो कोई खोले उसको मारे भैरों काला ।

काला भैरो कपले केस कानों कुंडल भागों भेष तीर बाँधूँ तरकस बाँधूँ

अस्सी कोस का बीर बाँधूँ उल्टा शव्द उसको मारे जो कोई भेजे शव्द

साँचा पिंड कांचा चले मंन्त्र ईश्वरोबाचा।
इस मंन्त्र का एक हजार बार पढ़ कर सिद्ध कर लें भैरों जी को दही और

बड़े का भोग दे दें कुत्ते को भोजन खिला दें फिर इसी मंन्त्र से भी धागा बना सकते हैं ।

प्रकट भगवान सूर्य नारायण

पंच ब्रह्म जिसमें गणेश बिष्णु शिव दुर्गा सूर्य ही पंचायतन देवता हैं जो इन पांचों की पंचायत में से एक हैं प्रकट नारायण हैं इस बात को हमारा धर्म ही नहीं विज्ञान भी मानता है कि अगर सूर्य न हो तो पृथ्वी पर जीवन ही सम्भव नहीं है इसलिए भावुक भगत इन्हें सूर्य नारायण कहते हैं। इनकी शक्ति को सबिता कहा जाता है । हिंदुओं का प्रसिद्ध गायत्री मंत्र मूल रूप से सूर्य की ही स्तुति हैं। हर साधक हर रोज सूर्य को अर्घ्य दे कर भगवान सूर्य नारायण का धन्याबाद करता है। इनका पँचपादात्मक मंन्त्र है जिसमें सप्त व्याहृतियाँ हैं और गायत्री मंन्त्र के बाद परो रजसे सावदोम् आपो ज्योति रसोअमृतम ये दो पद भी जुड़े हुए हैं ।
सूर्य को आंखों का भी कारक माना जाता है इसलिए चाक्षुषी विद्या नाम का एक स्तोत्र है जिसका लगातार पाठ करने से आंखों के रोग नष्ट हो जाते हैं ।अगर कोई व्यक्ति लगातार चाक्षुषी विद्या का पाठ करे और उसका12500 पाठ करके हवन कर दे तो उसकी आंखें बिल्कुल ठीक हो जाती हैं आंखों की विमारियों के लिए ये अचूक बिधान है ।
सूर्य को अर्घ्य देने से हमारे आभामंडल में जो नकारत्मकता होती है उसकी सफाई होती है और हमारे आभामंडल की सफाई से हमारा तन मन पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है ।
सूर्य के लिए एक बहुत ही प्रभाबशाली मंन्त्र है ।
ओम ऐं ह्रीं श्रीं सूर्यनारायनाय नमः
इस मंन्त्र का सवा लाख जप छह महीने के अंदर करके उसका हवन तर्पण मार्जन ब्राह्मण भोजन करबायें इससे सूर्य भगवान खुश हो कर साधक को यश मान और सुख प्रदान करते हैं ।

शिव नवार्ण मंन्त्र
आज से लगभग40 वर्ष पहले इस मंन्त्र को एक साधक ने ब्रह्मांड से प्राप्त किया था और उसकी साधना करके उसे प्रकट भी कर दिया था पहले पहले उन्होंने अपने शिष्यों को बताया तो उनके शिष्य इसकी उग्रता की शिकायत करने लगे जिसकी बजह से उन्होंने इसमें एक ओम और जोड़ कर उसे दशाक्षरी बना दिया था जिससे इसकी ऊर्जा कम हो गयी थी
आज मुझे लगता है कि शिव नवार्ण मंन्त्र को जन साधारण के लिए प्रकट कर देना चाहिए
ओम ऐं ह्रीं क्लीं शिवाय नमः
एक शक्ति मंन्त्र भी है
ओम ऐं ह्रीं क्लीं शिवायै नमः
शिव उपासक पहले मंन्त्र की साधना करते हैं और शक्ति उपासक दूसरे मंन्त्र की साधना करते हैं
बिधि इस मंन्त्र के जप से पहले गणेश मंन्त्र का जप करें उनसे इस मंन्त्र का जप करने की अनुमति प्राप्त करें बाद में इस मंन्त्र का सवा लाख जप करें इसका हवन तर्पण मार्जन और ब्राह्मण भोजन करबायें किसी साधु को बस्त्र और दक्षिणा दे कर आशिर्बाद लें बाद में इसका जप करते रहें हर तरह से लाभदायक मंन्त्र है

चमत्कारिक रोग नाशक शावर मन्त्र

ये मन्त्र हर तरह की आधि व्याधि को नाश करके व्यक्ति को आरोग्यता प्रदान करता है

बन्दी छोड़ कुबन्दी खाये
कहे मच्छेन्दर सब व्याधि जाए

जल धूप दीप फूल लौंग इलायची सिंदूर नैवेद्य के रूप में बतासे रख कर1000 जप करें मन्त्र सिद्ध हो जाएगा फिर मोरपंख से झाड़ें या बिभूति से झाड़ें जल बना कर भी दे सकते हैं ।

शत्रुनाशन प्रयोग
बहुत दिनों से कुछ मित्रों की इनबॉक्स में शत्रुनाशन प्रयोग के लिए जिज्ञासा आ रही थी लेकिन आजकल बहुत से लोग भ्रम की बजह से ही किसी को भी दुश्मन मान लेते हैं इसलिए ऐसा प्रयोग देने की इच्छा नहीं थी लेकिन आज भगवती की इच्छा से ये प्रयोग प्रकट करने की इच्छा हुई इस प्रयोग को दयाभाव के रोगी न करें क्योंकि भगवती आपकी मर्जी से दण्ड नहीं देगी वह तो अपने पैमाने से ही दंडित करेगी और अगर शत्रु के दंडित होते ही आप दया दया चिल्लाने लगेंगे तो आप भी निश्चित ही पिटेंगे।
ये दो श्लोकों का प्रयोग है
ओम ह्रीं जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते
अचिन्त्य रूप चरिते सर्वशत्रु विनाशिनी
शरण्ये त्र्यम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ह्रीं ओम ।

इस मंन्त्र द्वय का 12500 जप दशांश हवन तर्पण मार्जन ब्राह्मणभोजन कन्या बटुक भोजन भी होगा।
भगवती के साथ साथ भैरव और हनुमान जी का पूजन आवश्यक है। ये प्रयोग किसी भी पुस्तक में प्रकाशित नहीं है महात्मा जनों के मुख से ही सुना था आज जनहितार्थ उन्हीं गुरुजनों की प्रेरणा से आप लोगों को समर्पित कर रहा हूँ अगर कोई बात समझ न आये तो अबश्य पूछिये ।

शाबरी रक्षा कबच मंन्त्र

बिधि किसी भी शुभ महूर्त में1000 जप करके सिद्ध कर लें हर तरह से रक्षा करता है इससे बिभूति जल लौंग इलायची बिभूति धागा बना कर दे सकते हैं


सातों पुनि शारदा बारह वर्ष कुमार एक देवी सुमरिये चौदह भुवन द्वार
दो भेखां च निर्मली तेरह देवी देव अष्ट भुजी परमेश्वरी ग्यारह रुद्र शिव
सोलह कला समपूर्णी तिन नयनी भरपूर दस अवतार तू उतरी पंज पांडवां दी रख
नौ नाथ षडदर्शनी पंद्रह तिथि जान चार जुगों में तू बड़ी कर माई कल्याण


ये 34 का यन्त्र भी है और भगवती की स्तुति भी है इसको मैंने अनेकों साधकों के पास अलग अलग रूपों में देखा है जैसे शारदा की जगह कालिका जालपा भवानी शीतला इंदिरा भगौती शव्द भी देखे हैं लेकिन मूल रूप से ये भगवती की ही स्तुति है इसका जप करते हुए यन्त्र निर्माण किया जाता है अकेले जप करके हवन भी करते हैं फिर बाद में यन्त्र निर्माण करते है कई लोग यन्त्र को भोजपत्र पर लिख कर उसका भी हवन करते हैं कुछ लोग इसे जल प्रवाह भी करते हैं कुछ लोग इसे हवा में भी उड़ाते हैं कुछ अपने घर के अंदर गड्ढा करके भी दबाते हैं इससे सभी काम होते हैं

सरकारी नौकरी के लिये प्रयोग

सर्वप्रथम अपने कुलदेवताओं और पितरों की शांति कीजिये किसी योग्य ज्योतिषी को अपनी जन्मपत्रिका दिखाइये कि क्या आपको सरकारी नौकरी का योग है अथवा नहीं ।
फिर दशमेश और सूर्य को बलि कीजिये सरकारी नौकरी के योग अवश्य बनेंगे ही।
गणेश शतनाम का 11000 पाठ कीजिये

और सूर्य सहस्रनाम का4000पाठ कीजिये
ये सब पूर्ण होने से पहले पहले ही सरकारी नौकरी मिल जाएगी लेकिन तितलियों और भँवरों से बचना ही पड़ेगा


ओम कुलतारिणी देव्यै नमः
इस मंत्र का सवा लाख जप करने से अनेक पीढ़ियों से रूष्ट कुलदेवी भी खुश हो जाती है और व्यक्ति के पूरे परिबार का कल्याण करती हैं इसे हर कोई कर सकता है दीक्षित हो या अदीक्षित ये मन्त्र निष्किलित भी है और बिना शाप के भी। इसे करिये और लाभ उठाइये ।
जय भवानी जय महाकाल

काला कीड़ा कुलबुला बत्ती दंद सुलखना
दुहाई शाह फरीद की बिच्चे बद्धा मरे

1000 जप करके सिद्ध कर लें। बाद में जिस दांत में दर्द हो उस पर लोहे की कील से झाड़ें


बाघ बिजली सर्प चोर
चारों बाँधूँ एक ठौर धरती माता आकाश पिता रक्ष रक्ष परमेश्वरी कालिका दुहाई महादेव की। शव्द साँचा पिंड कांचा फुरो मन्त्र गोरखनाथ वाचा
1000 जप करके सिद्ध कर लें फिर जल से या चाक़ू से घेरा बना लें हर तरह से रक्षा होगी

काली चिड़ी चहचहाये बन में व्याही आये
हनुमान ठाके पीड़ा सिर की पीड़ा जाए चले मन्त्र फुरे वाचा देखां हनुमान वीर तेरे इल्म का तमाशा
1000 जप कर सिद्धि कर लीजिये फिर बिभूति से सिर की पीड़ा झाड़ें अगर आधे सिर की पीड़ा हो तो आधा शीशी जाए ऐसे बोलें

शावर मन्त्र सिद्ध करने का बिधान
एक लकड़ी की चौकी पर कपड़ा बिछाएं उस पर एक लोटे में जल भर कर रखें उसे कलाबा लपेटें उसमें एक पूरा फूल डालें उसे ईशान कोण में रख दें आग्नेय कोण में ज्योति जला कर रखें बायव्य कोण में धूप रखें अपने सामने गणेश और इष्टदेवता का फोटो रखें पूजा की थाली में फूल चाबल गन्ध।टिक्का और गुड़ रखें अपने पास भी एक लोटे में जल रखें जिससे आप देवता का पूजन करेंगे गणेश गुरु इष्टदेवता ग्राम देवता स्थान देवता शक्ति पीठ की शक्ति उनके भैरव इनको नमस्कार करें फिर जप करें जप के बाद जप देवता को अर्पित करें थोड़ा सा जल भूमि पर छोड़ें उसे माथे से लगाएं ताजा जल लेकर सूर्य या चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
बाकी शावर मन्त्रों में ज्यादा बिधि बिधान नहीं होता है जितना कर सको उसी से हो जाता है बस श्रद्धा और बिश्वास होना चाहिये
जय भवानी जय महाकाल

काली माई कूकां मारे गौरां माई हस्से
हनुमान वीर
छड्डे चिंगाड़े छड मकान व्याधि नस्से

गूगल लौंग इलायची गुड़ घी को मिला कर आग पर डालते हुए ये मन्त्र पढ़ें । हर तरह की आधि व्याधि से राहत मिलती है1000 बार जप करके सिद्ध कर लें।अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी प्रयोग कर सकते हैं

जब स्त्रियां प्रसूता होती हैं तो उस समय उनके स्तन में गांठ हो जाती है जिससे उन्हें भयंकर दर्द भी होता है और बुखार भी हो जाता है डॉक्टर के पास जाओ तो डॉक्टर स्तन कैंसर ही बता देते हैं लेकिन इस मन्त्र से साधक अपने शरीर पर झाड़ता है और उस स्त्री को तुरन्त लाभ हो जाता है

ऊंची लंबी टेकड़ी भैरों गाय चराय
दूधी अपनी ठाकां पीड अमुकी की जाय

1000 जप करके सिद्ध कर लें फिर नहा धो कर आराम से बैठ कर बिभूति से स्त्री के जिस स्तन में दर्द है उससे अपने उल्टे स्तन पर बिभूति से 5।7 बार झाड़ा लगाएं यानी स्त्री के वाएँ स्तन में दर्द हो तो अपने दाएं स्तन पर बिभूति से झाड़ें ।
जय भवानी जय महाकाल

सबसे पहले कुछ दिन तक धूनी का प्रयोग करें फिर इस का प्रयोग करें

काली काली महाकाली ब्रह्म की बेटी इंद्र की साली दोनों हाथ बजावे थाली जा बैठी पीपल की डाली मारी माह गूगल की डली काली माता उतर दिशा में खड़ी उत्तर दिशा की काली उत्तर दिशा को बांध पूर्व दिशा को बांध दक्षिण दिशा को बांध पश्चिम दिशा को बांध घर के चारों कोने बांध आकाश को बांध पाताल को बांध मेरे बांधे न बंधे तो महादेव की दुहाई गुरु गोरखनाथ की आन ।
1000 जप करके सिद्ध कर लें अगर एक माला रोज करेंगे तो दस दिन में होगा अगर बैठक लगाएंगे तो एक दिन में भी हो जाएगा फिर तांबा चांदी लोहा सिक्का।लेड की चार।चार 11 जोड़े बनाएं इन पर एक माला जप करके उत्तर दिशा से शुरू करके ईशान पूरब आग्नेय दक्षिण नैऋत्य पश्चिम वायव्य एक घर के ऊपर और एक घर के अंदर इस तरह10 कील के जोड़े और11 बां जोड़ा घर के मुख्य गेट पर गाड़ दें । सबसे पहले घर के ऊपर फिर घर के अंदर फिर उत्तर दिशा से वायव्य तक।पानी में शराब मिला कर पानी गिराते हुए इन कीलों के जोड़ों को कार दे दें

ओम गुरु जी आदेस
आसन बाँधूँ सिंहासन बाँधूँ दुश्मन की चौरासी लाख शक्ति को बाँधूँ तुझे बाँधूँ तेरे गुर पीर को बाँधूँ बाँधूँ कंचन काया योग जहां से आये वहीं को बापस जाए ओम गुरु जी नाथ जी आदेस आदेस ।
1000 जप से सिद्धि होती है बाद में फूल या चावल पर5।7 मन्त्र पढ़ कर आसन के नीचे रखने से आसन बन्ध जाता है और हर तरह से सुरक्षा होती है
जय भवानी जयमहाकाल


काला भैरों कपिले केस
कन्न बिच्च मुद्रां भगबां भेष सोने की संगल रुपे का कड़ा जहां सिमरां तहां बम भैरों हाजिर खड़ा माता पार्वती के परवाने आये सच कहो सच की बातें कहो।सिर चड़ी खेलो मुख चढ़ी बोलो मेरा कहा न करो तो गुरु गोरखनाथ की दुहाई।
मेरी भगति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा


3 माला रोज41 दिन तक हर रोज लड्डुओं का भोग होगा सब कुछ बिल्कुल विस्तार से बता दिया है


किसी भी तांत्रिक के पास जाओगे तो वह आपको डोरा या धागा बना कर देगा जिसे गण्डा भी कहा जाता है ये हमारी लोकल शक्तियों के नाम से बनाया जाता है । कई लोग उस स्थान के शक्ति पीठ के नाम से भी गण्डा बनाते हैं जैसे हम लोग गण्डा बनाएगा तो ऐसे बोलेंगे

बन्ध तो बन्ध बाबा बालकनाथ का बन्ध कीड़े और मकोड़े का बन्ध ताप और तिजारी का बन्ध जड़ी और बुखार का बन्ध नजर और टोक का बन्ध दीठ और मुठ का बन्ध किये और कराए का बन्ध भेजे और भिजाये का बन्ध पैरों और हाथों का बन्ध बन्ध तो बन्ध बाबा बालकनाथ का बन्ध राह और चौराहा का बन्ध जमीन और आसमान का बन्ध घर और बाहर का बन्ध पवन और पानी का बन्ध कुआं और पनिहारी का बन्ध लोहा और कलम का बन्ध बन्ध तो बन्ध बाबा बालक नाथ का बन्ध
1000 बार जप कर सिद्ध कर लें और फिर डोरा बना कर दें

बाबा बालकनाथ की जगह किसी पीर फकीर या सिद्ध का नाम भी ले सकते हैं हम लोग माता ज्वालामुखी जी के नाम से भी गण्डा बनाते हैं सिर्फ बाबा बालकनाथ की जगह ज्वालामुखी का नाम लेते हैं।
कई तांत्रिक केवल इसी मंन्त्र के सहारे सिद्ध बने हुए हैं बस उन्होंने इस का मन्त्र12500 से ज्यादा किया हुआ है

कई बार किसी अभिचार की बजह से स्त्री को अत्याधिक खून निकलता है डॉक्टरी इलाज से भी फायदा नहीं होता है इसी तरह कई पुरुषों को भी गुदा मार्ग से खून आता है इसे रोकने के लिए इसे प्रयोग किया जाता है।
नोट ये बिद्या पूरी तरह से मुफ्त किये जाने के लिए है इसका पैसा नहीं ले सकते हैं

सार का कोल्हू समर की लाट
लूणा चमारिन हाकी पाट
उल्टा सुल्टा रक्त चले अर्जुन चूके बाण इसी घड़ी इसी पल इसी बक्त अमुक के चलते रक्त को बन्द न करे तो कपूरी धोवन की आन। शव्द साँचा पिंड कांचा फुरे मन्त्र ईश्वरोवाचा

1000 जप करके सिद्ध कर लें 108 बार हवन कर दें फिर पानी पिलाने से या डोरा धागा बना कर देने से खून बन्द हो जाता है अनुभूत है।
इसके लिए साधक के पास इस मन्त्र की सिद्धि के अतिरिक्त इष्टवल होना भी जरूरी है नहीं तो खुद भी फंस सकते हैं
जय भवानी जय महाकाल

ओम ह्रीं मंगलचण्डिके पर कृत यन्त्र मन्त्र तंत्रान् नाशय नाशय हूँ फट स्वाहा

इस मन्त्र का 12500 जप दशांश हवन तर्पण मार्जन करने से सिद्ध हो जाएगा फिर आप किसी का भी जादू जन्तर काट सकते हैं अगर लंबे समय तक लोकभलाई करनी हो तो सवा लाख जप हवन तर्पण मार्जन कन्यापूजन कर लें
इससे धागा जल बिभूति लौंग इलायची सफेद मिर्च बना कर दे सकते हैं मेरे एक शरारती मित्र के अनुसार केवल इसी एक मन्त्र से साधक सिद्ध बन सकता है

शत्रु ताड़न प्रयोग


जब शत्रु हद से ज्यादा तंग करने लगे और कई बार उसको क्षमा करने के बाद भी वह आपको तंग करने से बाज न आये तो उसके लिए ये मन्त्र प्रयोग किया जाता है
विनियोग ओम अस्य गर्ज गर्ज क्षण मूढ़ इति मन्त्रस्य बिष्णु ऋषि श्री महालक्ष्मी देवता गूं बीजं गौमुखा शक्ति श्रीसुन्दरी महाविद्या रजोगुणं त्वक ज्ञानेन्द्रिय तीव्र स्वरं अग्नि तत्वं श्रीं उत्कीलनँ ममरक्षा अर्थे च शत्रु ताड़नार्थे जपे बिनयोगः
ओम ऐं गूं नमः
गर्ज गर्ज क्षणं मूढ़ मधु यावत् पिवाम्यहम्
मया त्वयि हते अत्रैव
गर्जिष्यन्त्याशु देवताः नमो ऐं गूं ओम

इस मंन्त्र को एक हजार जप करके सिद्ध कर लें दशांश हवन जिसमें शाक्लय जिसमें तिल जौ चावल शहद और घी मिला कर हवन करें बक्त के समय शराब की आहुति देने से शत्रु को कष्ट होता है लेकिन ये अति आवश्यक होने पर ही करना चाहिए अकारण किसी को तंग करने के उद्देश्य से ये काम नहीं करेगा ऐसा गुरु आदेश है
जय भवानी जय महाकाल

किसी भी ज्योतिषी और तांत्रिक के लिए ऐसी बिद्या की बहुत अधिक आबश्यक्ता होती है लेकिन इसके लिए सबसे बड़ी चुनोती होती है गोपनीयता की। इस मन्त्र की साधना के27 दिन तक आप इस शक्ति से काम नहीं लेना चाहिए।ये साधना यूं तो नबरात्रि के नौ दिन में ही की जाती है लेकिन इसे पूरा होने में बहुत समय लगता है
मन्त्र

ओम नमो भगवती श्रुतदेवी हंसवाहिनी त्रिकालनिमित प्रकाशिनि सर्वकार्य प्रकाशिनी सत भावे सत भाषे असत का प्रहार करे ओम नमो श्रुतदेवी स्वाहा।

बिधि किसी बाजोट पर सफेद बस्त्र बिछाएँ उस पर सरस्वती की मूर्ति रखें जो हंस पर बिराजमान हो उसकी पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा करें गाय के घी का दीपक जलाएं सफेद वस्त्र सफेद आसन बिछाएं स्फटिक की माला से सुबह9 माला दोपहर9 माला और रात्रि को9 माला जप करें यानी एक दिन में27 माला जप होगा । इससे मन्त्र सिद्ध हो जाएगा लोगों की समस्याओं का आपको मन में उत्तर मिलने लगेगा लेकिन इसके लिए आपको अगले18 दिन तक इंतजार करना होगा इसके बाद भी आप यथाशक्ति जप करते रहें कन्यापूजन करें। बहुत ही बढ़िया बिधान है जितना झूठ बोलने से बचेंगे उतनी ही शक्ति बनी रहेगी असत्य भाषण और असत कर्म से शक्ति का ह्रास होता है निरन्तर इस मन्त्र का जप करते रहना चाहिए कहते हैं कि इस मन्त्र का जो नौ पुरुश्चरण कर लेता है वह त्रिकालज्ञ हो जाता है।ये मन्त्र और बिधान एक साधक से मिला था। बैसे पुस्तकों में भी उपलब्ध है।

ओम आदेस गुरु जी को आदेस
जल खोलूं जल वायु खोलूं खोलूं जल का बीर
ऊपर खोले बजरंग बली नीचे भैरों बीर
धरती खोलूं आकाश खोलूं खोलूं अग्नि माई
तैंतीस करोड़ देवता खोलूं खोले कालिका माई चार खूंट पृथ्वी के खोलूं नौ नाथ चौरासी सिद्ध खोलूं वाबन वीर खोलूं चौंसठ योगिनी खोलूं कुल के देवी देवता खोलूं कुल के पितर खोलूं ग्राम देवता खोलूं स्थान देवता खोलूं वास्तु देवता खोलूं।।।।।।।।।। खोलूं मेरे खोले न खुले तो गुरु गोरखनाथ की आन गौरां पार्वती ईश्वर महादेव की दुहाई
शव्द साँचा पिंड कांचा चले मंत्र ईश्वरोवाचा


नोट।।।।।।।। यहां कुछ भी जोड़ सकते हैं मकान दुकान खेत खलिहान बनिज व्यापार
बिधि इस मंत्र की21 माला जप 21 दिन में करें दिशा पूर्व या उत्तर आसन कोई भी हो जल सिंदूर घी और तेल का दीपक दोनों फूल गुड़ हलुवा लापसी का भोग साबूत चावल सामने रखें। हर तरह का बन्धन खोलने के लिए चावल का ही प्रयोग होगा उड़द या सरसों का प्रयोग नहीं होगा । विशेष इस मन्त्र का प्रयोग किसी भी किस्म के बन्धन के लिए नहीं किया जा सकेगा ऐसा गुरु परम्परा का सख्त आदेश है कोई भी ऐसी गलती न करे नहीं तो उसका शरीर का बन्धन और धन की आवक बन्द हो जाएगी

एक विशेष उपाय

जब घर में कोई बहुत ज्यादा विमार हो जाये बचने की उम्मीद बहुत ही कम हो।उस समय घर का कोई व्यक्ति एक रुमाल में कुछ रुपये बांध कर सन्कल्प के साथ पूजा स्थल में रख दें कि जब ये व्यक्ति पूर्णतः स्वस्थ हो जाएगा तो ये पैसे गौशाला या मन्दिर में दे दिए जाएंगे। उस व्यक्ति के ठीक होने के बाद उन पैसों में कुछ रुपये और मिला कर मन्दिर या गौशाला में चढ़ा दें यहां पर पैसा अपनी हैसियत के अनुसार लेना होगा बाकी परमात्मा के निमित श्रद्धा बिश्वास बहुत आवश्यक है ये उपाय बहुत ही प्रभावशाली है जो कभी भी खाली नहीं जाता है जय भवानी जय महाकाल

ओम ह्रीं
या देवी सर्वभूतेषु धृति रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
ह्रीं ओम

इस मन्त्र का जप 12500 बार करें दशांश हवन तर्पण मार्जन कन्या पूजन भी करें
इसी मन्त्र से अभिमंत्रित करके घर में छिड़काव करें क्रोधी व्यक्ति को पिलाएं भी।धीरे धीरे घर में कलह क्लेश कम होता जाएगा

षडचक्र और देवता
मूलाधार चक्र में गणेश जी का स्थान है पृथ्वी तत्व है लं बीज है गणेश जी के कुपित होने पर भगन्दर बबासीर फिशर आदि बीमारियां होती हैं।

स्वाधिष्ठान चक्र

इस चक्र में ब्रह्मा जी का स्थान है जल तत्व हैं वं बीज है ब्रह्मा जी के कुपित होने से मूत्र सम्बन्धी बीमारियां और नपुंसकता संबन्धी रोग होते हैं
मणिपूरक चक्र
इस चक्र के बिष्णु देवता अग्नि तत्व रं बीज है इस चक्र के विकृत होने से पेट सम्बन्धी अनेकों रोग होते है नाभि का बार बार टलना भी इसी चक्र की विकृति की निशानी है
अनाहत चक्र
इस चक्र के रुद्र देवता हैं वायु तत्व है यं बीज है इस चक्र की विकृति से दिल और फेफड़ों से सम्बंधित रोग होते है महामृत्युंजय मंत्र से इसी स्थान की पुष्टि होकर आयु बृद्धि और आयुष्य प्राप्त होता है।
विशुद्ध चक्र
ये स्थान भगवती दुर्गा का है जिसे मूल प्रकृति भी कहा जाता है यहां आकाश तत्व है हं बीज है इसकी विकृति से गले से सम्बंधित रोग होते है इसकी विकृति से लार का बनना बहुत ही कम हो जाता है बार बार मुख सूखता रहता है कई बार गला ही बन्द हो जाता है कुछ भी बोलना मुश्किल हो जाता है
आज्ञा चक्र

ये मन का स्थान है यहां के भगवान शिव देवता हैं यहां पर इड़ा पिंगला और सुषम्ना का भी मिलन स्थल है त्राटक से इस स्थान को जागृत किया जाता है इसके जागृत होने पर सिर में भयंकर दर्द होता है अगर यहां पर कुंडलिनी विकृत हो जाये तो आधे सिर में बहुत दर्द होता है। इसके जागृत होने पर दिव्य ज्योति के दर्शन होते हैं यहां पर ओम शव्द है यहां तक ही साकार का साम्राज्य है इससे आगे निराकार का खेल है जिसे अकालपुरुष अलखनिरंजन भी कहा जाता है
सहस्रार चक्र
ये शिव और शक्ति का मिलन स्थल है सनातन धर्म इस स्थान को पारब्रह्म परमात्मा का स्थान कहा जाता है इस स्थान पर मधुकुण्ड भी है और अमृत कुंड भी ।
इसी स्थान के बारे में वेद भी नेति नेति कहते हैं मेरे जैसा अबोध बालक इसके बारे में क्या कह सकता है


आज बहुत से परिबारों में घर के कई सदस्य लड़ाई झगड़े करते हैं और बुरा व्यबहार करते हैं बाद में उन्हें भी लगता है कि ये गलत था ऐसे लोग खुद या उनके परिबार का कोई सदस्य इस मन्त्र का जप करे तो पूरे परिबार में ही सद्बुद्धि आती है जिससे लड़ाई झगड़े बन्द हो जाते हैं

ओम ह्रीं
या देवी सर्वभूतेषु मति रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
ह्रीं ओम

इस मन्त्र का12500 जप उसका दशांश हवन तर्पण मार्जन करने से ये मन्त्र सिद्ध हो जाता है जिसके परिणाम स्वरूप परिबार में सुमति की प्राप्ति होकर सुख समृद्धि और शांति प्राप्त होती है जय भवानी जय महाकाल

अजर का कोल्हू बज्र की लाट
कहे मछेन्द्र जादू तंत्र काट

बिधि उत्तर दिशा की तरफ में मुंह करके इस मन्त्र12500 जप करें सामने चाकू और सिंदूर रखें एक माला पूरी होने पर चाकू पर सिंदूर लगाएं जप पूरा होने पर गुरू मछेन्द्रनाथ जी के नाम से प्रसाद बांट दें। प्रयोग के समय इसी चाकू का प्रयोग होगा ।
1 जमीन पर खड़ी 7रेखाएं खींचिए फिर आड़ी रेखाएं खींचते हुए उन्हें काट दीजिये
2 एक थाली में पानी भर कर उसमें उपरोक्त बिधि से रेखाएं खींचिए और काट दीजिये
3 किसी फल पर उसी चाकू से काटिये और दूर फेंक दीजिये

4 बिभूति लीजिये और फैलाइये उसे भी काटिये और रोगी को खिला दीजिये
5 एक सात अनाज का रोट बनाइये रोगी से उतारिए खड़ी और तिरछी रेखाओं से काटिये
इसी तरह इस मन्त्र का तांत्रिक लोग प्रयोग करते देखे गए हैं और तुरन्त लाभ भी होता है मेरे गुरु तुल्य धुंआ बाबा का प्रयोग है मैँने अनेकों बार प्रयोग किया है || नोट इस मंत्र का प्रयोग करने के लिए इष्टवल और गुरु कृपा होना बहुत आवश्यक है वर्ना कोई गंदी शक्ति बापिस अटैक भी कर सकती है

रक्ष रक्ष मात काली रक्ष रक्ष महेश्वरी
रक्ष रक्ष महामाया रक्ष रक्ष मां सर्वदा

इस दिव्य मन्त्र का12500 जप करने से ये सिद्ध हो जाता है इसका दशांश हवन तर्पण मार्जन करने से ये मन्त्र पूरी तरह से जागृत होकर हर तरह के तन्त्र से रक्षा करता है
लोककल्याण करने बालों को इसे सवा लाख जप कर लेना चाहिए और धागा जल बिभूति लौंग इलायची बना कर देना चाहिए
जय भवानी जय महाकाल

ये एक अत्यंत गोपनीय साधना है जिसे कोई भी प्रकट नहीं करता है बाबा जी स्वामी दत्तात्रेय जी सम्प्रदाय के साधक है और अजर अमर हैं। ये बहुत जल्दी खुश हो जाते हैं और अपने भगत की हर इच्छा पूरी करते हैं इनकी कृपा से पितर और कुलदेवता जल्दी खुश हो जाते हैं इनकी कृपा से इष्टदेवता ग्राम देवता और शासन देवता भी खुश हो जाते हैं मैंने आज से अपनी समस्त मन्त्र बिद्या इन्हें ही समर्पित कर दी है आज से मेरे द्वारा प्रेषित मन्त्रों को सिद्ध करने से पहले इनकी पूजा आवश्यक होगी तभी मेरे मन्त्र जागृत होंगे

मन्त्र
ओम श्रीश्वेतांवरधराय सिद्धेश्वराय मंगलेश्वराय नमः

इस मन्त्र का जप रुद्राक्ष की माला पर पूरब या उत्तर की तरफ मुंह करके12500 जप करने से सिद्ध हो जाता है। इनकी पूजा करने के लिए मोरपंख की मुट्ठी रखना आवश्यक है उसी पर उनका पूजन होता है
जय भवानी जय महाकाल

ओम गुरु जी देहरा सहाई लक्ष्मी मम कार्य कुरु कुरु स्वाहा।
इस मन्त्र का सवा लाख जप करें । अगर सम्भव हो तो हर शुक्रबार के दिन अपने किये हुए पाठ का दशांश हवन करते रहें ।
ये एक शावर मन्त्र है जो बहुत ही चमत्कारी मन्त्र है जिसके हर व्यक्ति को अलग अलग अनुभव होते हैं । बिधि एक चौकी पर लक्ष्मी जी की फोटो या मूर्ति रख कर पूर्ब ।उत्तर की तरफ मुंह करके पंचोपचार पूजन करें और रुद्राक्ष या कमलबीज की माला से पाठ करें ।
जय भवानी जय महाकाल

शहरी सुगर रोगियों के लिए उपाय
जिन भाई वहनों को सुगर का रोग हो वह गणेश जी को लड्डुओं का भोग लगा कर सुगर रोग समाप्ति हेतु प्रार्थना करें फिर दूसरे दिन से हर रोज किसी मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति के पास जामुन फल चढ़ाना शुरू कर दें।21 दिन या41 दिन करें जितने दिन उपलब्ध हो सकें अगर पूर्ण श्रद्धा से ये उपाय किया जाए तो सुगर रोग से सदा सदा के लिए निजात मिल जाती है

गुप्त नवरात्रि आ रही है इसमें लक्ष्मी मन्त्र का जप करें धन लाभ होगा।
विनियोग अस्य श्री धनप्रद महालक्ष्मी सिद्ध शावर मन्त्रस्य श्री विष्णु ऋषि श्री महालक्ष्मी देवता श्रीं बीजं ह्रीं शक्ति क्लीं कीलकं मम सकल कामना सिद्धयर्थे जपे विनियोगः
मन्त्र
ओम श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवनपालिन्यै महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्यं नाशय नाशय प्रचुर धनँ देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ओम ।

इस मन्त्र का जप 9 दिन में 12500 करें ।धन लाभ होगा ।धन लाभ का दशांश अपने गुरुदेव को जरूर अर्पित करें कल्याण होगा अधिक लाभ के लिए सवा लाख जप दशांश हवन तर्पण मार्जन ब्राह्मण भोजन और कन्यापूजन भी करें ।
जय भवानी जय महाकाल

ओम आदेश गुरु जी को आदेश
सोने की दराटी रुपे का दराट
भैरों हत्थ दराटी हनुमान हत्थ दराट
काट काट भैरों बलि महावीर हनुमान
जादू काट जंतर काट हर तरह का तन्त्र काट
बन्धन को खोल कीलन को काट
मेरे कहे न करे तो माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की आन
शव्द साँचा पिंड कांचा चले मन्त्र ईश्वरोवाचा

इस मन्त्र से हर तरह का कीलन बन्धन जादू जंतर तन्त्र कट जाता है लेकिन इसे सिद्ध करना थोड़ा मुश्किल होता है
बिधि इस मन्त्र का जप रात 11 बजे से तीन बजे के बीच12500 करना होता है जल धूप दीप फूल चाबल छूरी हनुमानजी का सिंदूर हनुमान जी के लिए रोट भैरों जी के लिए 2लड्डू माता काली के लिए बतासे रखने होते हैं। जितना ज्यादा जप करेंगे उतनी जल्दी हो जाएगा छह माला रोज करेंगे तो21दिन तीन माला करेंगे तो41 दिन में हो जाएगा इस मन्त्र से सिर्फ बन्धन खुलेगा किसी भी तरह से बन्धन लगेगा नही यही गुरु आदेश है
जय भवानी जय महाकाल

पिंडे सो ब्रह्मन्डे
जो हमारे शरीर में है वही ब्रह्मांड में भी है आजकल 33 देवता का बड़ा ट्रेंड चल रहा है वह आपकी रीड की हड्डी के मनके ही हैं वहीं उनका निवास है गुदा के पास गणेश जी गुप्तइन्द्रिय मूल में ब्रह्मा जी नाभि में विष्णु हृदय स्थल में रुद्र गले में शक्ति का स्थान है इसी तरह इसी शरीर में सब देवी देवता और भूत प्रेत भी आपके ही शरीर में सुप्त अवस्था में हैं साधक साधना द्वारा उन्हीं को जागृत करता है जब तक वह शरीर में जागृत नहीं होगा वह ब्रह्मण्ड से आकर आपका काम नहीं करेगा जब शरीर में जागृत हो गया तो उस स्थान विशेष में जागृति की अनुभूति होती ही है वीर भी आपके ही शरीर में विशेष स्थान से जागृत होते हैं और वहां पर दर्द होती है कर्णपिशाचिनी कान से जागृत होगी तो कान में दर्द होगा ही भले ही कम हो या ज्यादा।
जो साधक गणेश की उपेक्षा करके साधना में आगे बढ़ते हैं उन्हें गुदा से सम्बंधित रोग बबासीर भगन्दर फिशर जैसे रोग हो जाते हैं लेकिन उन्हें कभी कारण समझ ही नहीं आता है।
जय भवानी जय महाकाल


ओम गुरु जी ओहं सोहं गिरनार की छाया शिव पार्वती ने कल्प वृक्ष लगाया मुखे ब्रह्मा मध्य बिष्णु लिंगाकार महेश्वरा सर्वदेवता करें पूजा रुद्रदेवता नमोस्तुते
1000 बार जप करके सिद्ध कर लें एक माला से हवन कर दें मन्त्र जागृत हो जाता है फिर बढ़िया किस्म का रुद्राक्ष खरीदिये चांदी अथवा ताम्वे में मढ़बाइये इसी मंन्त्र की एक माला जप कीजिये रुद्राक्ष प्राण प्रतिष्ठित हो गया फिर इस रुद्राक्ष को सामने रख कर किसी भी शिव मंन्त्र का जप करते रहिए रुद्राक्ष पूरी तरह जागृत हो जाएगा पहनिए और शिव कृपा का अनुभव कीजिये

माला की सफाई
साधक जगत में बहुत कम लोग माला की सफाई की तरफ ध्यान देते हैं जबकि समय समय पर जपमाला को भी साफ करते ही रहना चाहिए नहीं तो वह भी दुष्प्रभाव देने लगेगी।जब हम जप करते हैं तो सकारत्मकता के साथ साथ नकारत्मकता भी माला पर दुष्प्रभाव डालने लगती है ।जिससे व्यक्ति के मन में जप के प्रति अरुचि होने लगती है।हर रोज सोचता है कि कल को जप करूंगा लेकिन जप के समय दिल ही नहीं करता है मन उचाट हो जाता है। मन में नास्तिकता के भाव आने लगते हैं । बैसे तो हर साधक अपनी गुरु पंरपरा के अनुसार माला साफ करते हैं लेकिन एक आसान बिधि के अनुसार
1 गंगा जल 2 गुलाब जल 3 केसर 4 देसी गाय का दूध 5 कुशा का जल
एक बर्तन में5 चीजें डाल कर उसमें माला डाल दीजिये उसे5।7 मिंट बाद निकाल कर कपड़े से पोंछ लें बाद में थोड़ी देर सूर्य की धूप में रखें और बाद पूजन करके फिर से जप कर सकते हैं।

खंडा चले बन्धन कटे फिर काहे चले संग कहे मच्छेन्दर सुन रे गोरख बन्धन हो जाय भंग माता काली की दुहाई
बिधि मंगल शनि से शुरू करके12500 जप करें सामने एक चाकू और हनुमानी सिंदूर रखें जप खत्म होने पर चाकू और सिंदूर पर फूंक मारें। जब प्रयोग करना हो तो जमीन पर सात रेखा चाकू से बनाएं और उन्हें तिरछा काट दें

भाग्य बन्धन शरीर बन्धन व्यापार बन्धन विवाह लग्न बन्धन सभी खत्म हो जाते हैं

अनेक बार का अनुभूत है

ये मन्त्र मुझे धुआं बाबा ने बताया था अजीब सा मन्त्र है लेकिन इसका प्रभाव बहुत बढ़िया है हर रोग में लाभ देता है

बैठ छुछुन्द्र चटनी खाये
कहे मच्छेन्दर सब व्याधि जाए

इस मंत्र का1000 जप करके सिद्ध कर लें फिर 100 बार हवन सामग्री से आहुति दे दें फिर मोरपंख या झाड़ू से झाड़ें लौंग इलायची बिभूति बना कर भी दे सकते हैं अनुभूत है

सबसे सरल साधना
इसका सूत्र पठेत् श्रिणुयादपि में निहित है अर्थात पढ़ना और सुनना दोनों ही समान रूप से फलदायी है आज के जमाने जैसे हेडफोन लगा कर गीत सुनते हैं उसी तरह चालीसा शतनाम और सहस्रनाम भी सुना जा सकता है हेडफोन लगा कर सुना गया स्तोत्र सीधा दिमाग में जायेगा और वहां से डीएनए में जा कर आपके कार्य सिद्ध कर देगा इसमें किसी भी पूजा पाठ यम नियम की भी जरूरत नहीं है सिर्फ अभीष्ट संख्या में सुनना ही है

अब इससे सरल साधना क्या हो सकती है और इस समय ,के लिए ये सबसे सरल और उपयोगी साधना है करके देखिये

जय भवानी जय महाकाल

ओम ह्रीं या देवी सर्वभूतेषु निद्रा रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ह्रीं ओम ।
इस मन्त्र का12500 जप करके सिद्ध कर लीजिये और फिर जिसको भी जल बना कर देंगे कितना भी पुराना अनिद्रा रोग है ठीक हो जाएगा
नोट जो भी व्यक्ति इस मन्त्र को सिद्ध करता है उसे अत्यन्त निद्रा आने लगती है अठारह घण्टे सोने के बाद भी नींद पूरी नहीं होती है अतः धीरे धीरे करें जल्दी न करें।
जय भवानी जय महाकाल

स्तोत्र और फल श्रुति
। बहुत से साधक कई किस्म के स्तोत्रों का पाठ करते हैं लेकिन या तो फल श्रुति पढ़ते ही नहीं हैं अगर पढ़ते भी हैं तो उसका अर्थ नहीं समझते जो अर्थ भी समझते हैं उसको क्रियान्वित ही नहीं करते हैं यानी पढ़ तो लिया लेकिन उसकी बाकी क्रिया की ही नहीं तो फल कैसे मिलेगा

मैँ दो स्तोत्रों का उदाहरण दे कर अपनी बात को समझाने का प्रयत्न करता हूँ पहला स्तोत्र है सर्वाधिक प्रसिद्ध स्तोत्र श्रीसूक्त जिसमें कहा गया है
यः शुचि प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यामन्वहम
श्रियः पंच दशर्च श्रीकामः सततं जपेत्
अर्थात इस स्तुति के बाद इन ऋचाओं को पढ़ते हुए घी से हवन करना चाहिये अब इसका पाठ तो बहुत से लोग करते हैं लेकिन इनका हवन एक प्रतिशत लोग भी नहीं करते हैं फिर शिकायत भी करते हैं कि श्रीसूक्त का बहुत पाठ किया लेकिन उसका कोई फल नहीं मिला ये तो वही हाल हो गया किसी बड़े आदमी को घर तो बुलाया लेकिन चाय को पूछा न पानी को और फिर बाद में कहा कि उसने मेरा काम ही नहीं किया

ऐसा ही एक और स्तोत्र है
गणेश अथर्वशीर्ष जिसकी फल श्रुति को भी कोई ध्यान से नहीं पढ़ता है जो पढ़ते भी हैं उसका अर्थ नहीं समझते जो समझते भी है वह बताये अनुसार करते ही नहीं हैं
अष्टो ब्रह्मणान सम्यग्ग्राहयित्वा सूर्य बर्चश्वी भवति यानी इस अथर्वशीर्ष को लिख कर आठ ब्राह्मणों को दान करने से आप तेजस्वी बनेंगे यानी आपको इस अथर्वशीर्ष की सिद्धि प्राप्त होगी फिर बाकी प्रयोग करेंगे तो आपको उनका फल मिलेगा लेकिन कोई नहीं करता और कहते हैं कि मैं तीन चार साल से पाठ कर रहा हूँ कोई फायदा नहीं मिला । इसलिये कोई भी स्तोत्र पढ़ें तो उसकी फल श्रुति को भी पढ़िए और उसे समझने की कोशिश कीजिये


ये यन्त्र मूल रूप से15 का ही यन्त्र है इसमें जिस तरह से भी जोड़ें सब का जोड़15 ही आता है इस यन्त्र को हिंदी के अक्षरों में ही लिखना चाहिय बैसे अगर आप चाहें तो इसे उर्दू के अक्षरों भी लिख सकते हैं । इस यन्त्र को अनार की कलम से अष्टगंध की स्याही से लिखा जाता है इसमें चार सीधी रेखाएं बना कर उसके ऊपर चार आड़ी रेखाएं बनाने से नौ खाने बन जाएंगे


मंन्त्र
ओम आदेस गुरु जी को आदेस
छह सात दूज की रखबारीएक पांच नौ जोबन बारी
आठ तीज चौथ की जाई
सिद्ध भवानी लक्ष्मी घर आई
शव्द साँचा पिंड कांचा लक्ष्मण जती का यही बाचा


┌───────────┬───────────┬───────────┐
│ 6 │ 7 │ 2 │
├───────────┼───────────┼───────────┤
│ 1 │ 5 │ 9 │
├───────────┼───────────┼───────────┤
│ 8 │ 3 │ 4 │
└───────────┴───────────┴───────────┘

इस यन्त्र को अगले तीन दिन तक हर रोज 15 ।15 यन्त्र लिखें दीपाबली के दिन 15 यन्त्र लिखने के बाद एक यन्त्र भोजपत्र पर लिखें उसकी प्राण प्रतिष्ठा करें फिर उसे अपने बटुए में रख लें साल तक पैसे की कमी नही रहेगी
अगर किसी दूसरे को ये यन्त्र देना चाहते हैं तो भी दिबाली के बाद ही यन्त्र बना कर दें । जो यन्त्र पहले बनाए हैं उन यंत्रों को पानी में बहा दें कई साधक इन्हें लाल बस्त्र में बांध कर अपने पूजा स्थल पर भी रख लेते हैं


ओम आदेश गुरुजी को आदेश सातों पुनि शारदा बारह वर्ष कुमार
एक देवी सुमरिये चौदह भुवन द्वार
दो भेखाँ च निर्मली तेरह देवी देव
अष्टभुजी परमेश्वरी ग्यारह रुद्र शिव
सोलह कला सम्पुरणी तिंन नैनी भरपूर
दस अवतार तू उतरी पंज पांडवां दी रख

नौ नाथ षड्दर्शनी पंद्रह तिथि जान
चार युगां च तू बड़ी कर मैया कल्याण

७ १२ १ १४
२ १३ ८ ११
१६ ३ १० ५
९ ६ १५ ४

{बॉक्स बनाकर उसमे लिखना है यन्त्र का बोक्स कैसे बनता है वो जरुर सीखें }

बिधि इस यन्त्र को उपरोक्त मंन्त्र पढ़ते हुए यन्त्र बनाया जाता है हर रोज34 यन्त्र 34 दिन तक बनाने पर सिद्ध हो जाता है ।फिर हर तरह की नकारत्मकता के नाश के लिए इसका प्रयोग किया जाता है इसे चांदी में मढ़वा कर गले में भी पहना जाता है।
धूनी की तरह भी आग पर रख कर धुआं भी करते हैं और पानी में डाल कर धो कर पिया भी जाता है । इसे सिरहाने भी रखा जाता है जिससे बुरे स्वप्न नहीं आते हैं

जय भवानी जय महाकाल