October 18, 2025 शाबर मन्त्र साधना अत्यंत प्रभावशाली, सरल और सर्वसुलभ साधना पद्धति है। यह किसी भी जाति, वर्ण, आयु, लिंग या धर्म के व्यक्ति द्वारा की जा सकती है। शाबर मन्त्रों के प्रवर्तक स्वयं सिद्ध-साधक रहे हैं, इसीलिए इनकी साधना में गुरु की अनिवार्यता नहीं होती, परंतु यदि कोई अनुभवी और निष्ठावान गुरु मार्गदर्शन करे तो साधना में आने वाले विक्षेपों से सुरक्षा प्राप्त होती है। साधना के समय साधक को किसी भी रंग की धुली हुई धोती पहननी चाहिए और किसी भी रंग का कम्बल आसन के रूप में उपयोग कर सकता है। दीपक के रूप में घी या मीठे तेल का दीपक जलाकर रखना चाहिए, जब तक मन्त्र-जप चलता रहे। धूप या अगरबत्ती में किसी भी प्रकार का प्रयोग किया जा सकता है, किंतु गूग्गूल और लोबान की धूप विशेष रूप से प्रभावी मानी गई है। दिशा का कोई स्पष्ट उल्लेख न हो तो साधक को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके साधना करनी चाहिए। क्रमांकविवरण / तथ्यविस्तृत वर्णन1साधना की पात्रताइस साधना को किसी भी जाति, वर्ण, आयु का पुरुष या स्त्री कर सकता है।2गुरु की आवश्यकताशाबर मन्त्रों में गुरु की अनिवार्यता नहीं है क्योंकि इनके प्रवर्तक स्वयं सिद्ध-साधक रहे हैं। फिर भी गुरु होने पर साधक विक्षेप से बचता है।3वस्त्र एवं आसनकिसी भी रंग की धुली हुई धोती पहनें, किसी भी रंग का कम्बल आसन बिछाएँ।4दीपकसाधना में घी या मीठे तेल का दीपक प्रज्वलित रखें जब तक मन्त्र-जप चले।5धूप / अगरबत्तीकोई भी प्रकार की धूप या अगरबत्ती ले सकते हैं, पर गूग्गूल और लोबान विशेष श्रेष्ठ मानी गई है।6दिशाजहाँ दिशा का उल्लेख न हो, वहाँ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके साधना करें।7मालाजहाँ माला का निर्देश न हो, कोई भी माला प्रयोग करें — ‘रुद्राक्ष माला’ सर्वोत्तम मानी गई है।8श्रद्धाशाबर मन्त्रों पर पूर्ण श्रद्धा आवश्यक है। अधूरा विश्वास या अश्रद्धा से फल नहीं मिलता।9आहार एवं नियमसाधना के दौरान एक समय भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।10स्वच्छतामन्त्र-जप से पूर्व स्नान करें और शुद्ध मन से आसन पर बैठें।11साधना का समयदिन या रात्रि किसी भी समय की जा सकती है।12मन्त्र-जपमन्त्र को ‘जैसा-का-तैसा’ जपें; वर्तनी सुधारना निषिद्ध है। उच्चारण शुद्ध हो।13दैनिक कार्यसाधना के दौरान सामान्य कार्य, नौकरी या हजामत कर सकते हैं।14स्थानघर का एकान्त कमरा, मन्दिर या नदी तट – कहीं भी साधना की जा सकती है।15अधूरी साधनायदि साधना अधूरी रह जाए, तो कोई हानि नहीं होती। पुनः आरम्भ किया जा सकता है। 🔮 शाबर मेरु मन्त्र या सर्वार्थ-साधक मन्त्र की सिद्धि विधि क्रमांकविषयविवरण1प्रारम्भकिसी भी शाबर मन्त्र की सिद्धि से पहले ‘शाबर मेरु मन्त्र’ या ‘सर्वार्थ-साधक मन्त्र’ का 10 माला जप करें।2हवन108 बार हवन करें, प्रत्येक आहुति के बाद ‘स्वाहा’ बोले।3उद्देश्ययह मन्त्र सभी शाबर मन्त्रों की ऊर्जा को जागृत करने वाला मूल मन्त्र है। 🕉️ सर्वार्थ-साधक-मन्त्र: “गुरु सठ गुरु सठ गुरु हैं वीर, गुरु साहब सुमरौं बड़ी भाँत ।सिंगी टोरों बन कहौं, मन नाऊँ करतार ।सकल गुरु की हर भजे, घट्टा पकर उठ जाग, चेत सम्भार श्री परम-हंस ।” 🙏 गणेश ध्यान एवं मन्त्र प्रकारमन्त्र / ध्यानउपयोगध्यान“**वक्र-तुन्ड माह-काय ! कोटि-सूर्य-सम-प्रभ !निर्विघ्नं कुरु मे देव ! सर्व-कार्येषु सर्वदा ।।**”साधना प्रारम्भ से पूर्व गणेश ध्यान करें।मन्त्र“वक्र-तुण्डाय हुं ।”एक माला जप करें। ⚔️ दिग्बन्धन मन्त्र (सुरक्षा हेतु) “वज्र-क्रोधाय महा-दन्ताय दश-दिशो बन्ध बन्ध, हूं फट् स्वाहा ।”📿 यह मन्त्र दसों दिशाओं को सुरक्षित करता है और साधना में विघ्न नहीं आने देता। 🕯️ हवन विधि सामग्रीमात्राविधिहवन सामग्रीआवश्यकतानुसारगौ-घृत से 108 बार हवन करें।मूल मन्त्र108 बारप्रत्येक आहुति के अंत में ‘स्वाहा’ का उच्चारण करें। 🛡️ आत्म-रक्षा मन्त्र “ॐ नमः वज्र का कोठा, जिसमें पिण्ड हमारा पैठा ।ईश्वर कुञ्जी, ब्रह्मा ताला, मेरे आठों याम का यती हनुमन्त रखवाला ।” 📿 इस मन्त्र का तीन बार जप करने से शरीर की सदा रक्षा होती है। 🌟 विशेष टिप्पणी बिंदुविवरणनाभि-दृष्टिनाभि में दृष्टि जमाने से ध्यान शीघ्र लगता है और मन्त्र शीघ्र सिद्ध होते हैं।चैतन्यता‘शाबर मेरु मन्त्र’ और ‘आत्म रक्षा मन्त्र’ को चैतन्य कर लेने पर साधना में सफलता शीघ्र होती है।सावधानीचैतन्यकरण के बिना प्रयोग करने से कार्य में विलम्ब या निष्फलता संभव है। Share this… Facebook Whatsapp Messenger Twitter Linkedin Threads Telegram Email Copy