तंत्र-शास्त्र में “शत्रु निवारण” का तात्पर्य केवल किसी विरोधी व्यक्ति को रोकना नहीं, बल्कि उन सभी नकारात्मक प्रवाहों, मानसिक आक्रमणों, दुष्प्रभावों और ऊर्जात्मक असंतुलनों को नियंत्रित करना है जो किसी साधक या परिवार की शांति भंग करते हैं। यह अवधारणा शत्रु-विजय से अधिक शत्रु-शमन

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