इस मंत्र का 11 बार जाप करके आसन पर बैठते ही, शूद्र-शक्तियाँ, भूत-प्रेत, बाधाएँ और छोटी-मोटी दैविक शक्तियाँ साधना में व्यवधान नहीं डाल पातीं; साथ ही किसी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव साधक पर नहीं होता। यह मंत्र सरल है—साधक इसे स्मरण कर लें और हर साधना से पूर्व आसन बिछाते समय इसका जाप अवश्य करें।

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