तंत्र साधना सामान्य वैदिक, दक्षिणमार्गी या योग साधना से बिल्कुल अलग दिशा में कार्य करती है। यह मार्ग शरीर को ही अस्त्र बनाकर उसकी ऊर्जा को नियंत्रित और उपयोग करता है।तंत्र में वाममार्ग, कुंडलिनी जागरण और विशेष रूप से भैरवी विद्या महत्वपूर्ण स्थान रखती है—हालाँकि यह मार्ग अक्सर विवादास्पद माना जाता है, लेकिन इसके सूत्र…...

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भैरवी विद्या शैव दर्शन पर आधारित एक अत्यंत गूढ़ विद्या है। इसका मानना है कि जन्म-जन्मान्तरों से जो चेतना, संस्कार और ऊर्जा हमारे भीतर विकसित होकर एक पूर्ण शरीर प्रदान करते हैं, वह सदाशिव का वरदान है। मानव-शरीर एक ऐसा यंत्र है जिसकी शक्तियाँ असीमित हैं।जब साधक इस यंत्र की ऊर्जा-धारा को समझकर उसे अधिक…...

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हर स्त्री का शरीर स्वयं में एक दिव्य योनि–पीठ है, जिसके बाएँ कोण में ज्ञान-शक्ति, दाएँ कोण में इच्छा-शक्ति, और नीचे के कोण में क्रिया-शक्ति प्रतिष्ठित मानी गई है। तांत्रिक परंपराओं में इसे ही कुंडलिनी ऊर्जा का केंद्र कहा गया है। वेदों में भी स्त्री को पुरुष का भाग्य और ऊर्जा-स्रोत माना गया है, क्योंकि…...

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