गुरु-तत्त्व और शिष्य-धर्म — पवित्र रहस्यों का सार गुरु मंत्र के दिव्य रहस्य हर किसी के सामने प्रकट नहीं किए जाते, क्योंकि यह मंत्र केवल शब्द नहीं, गुरु-कृपा का शुद्धतम स्वरूप होता है। सच्चा शिष्य वह है जो उठते-बैठते, चलते-फिरते, जागते-सोते हर क्षण गुरु मंत्र का जप करता रहता है। उसे कितना भी कठिन या असंभव कार्य क्यों न सौंप दिया जाए, वह…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here