हस्तमैथुन अत्यधिक हस्तमैथुन को आयुर्वेद में अतियोग की श्रेणी में रखा गया है, जहाँ किसी भी प्राकृतिक क्रिया का अति-प्रयोग धातुक्षय, ओज-क्षय, तथा वातदोष वृद्धि का कारण बनता है। आयुर्वेद के अनुसार वीर्य धातु न केवल शरीर को पुष्ट करता है बल्कि ओज का मुख्य आधार माना गया है। बार-बार वीर्यस्खलन होने पर धातु-परंपरा में बाधा…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here