आयुर्वेद में एक ऐसी औषधि का उल्लेख है,
जिसका नाम सीधे नहीं लिया जाता —
क्योंकि उसका प्रभाव केवल रोग मिटाने तक सीमित नहीं रहता।

यह औषधि तीन विशिष्ट फलों के संयोजन से बनती है,
और शास्त्रों में इसे

देह-शुद्धि, कोशिका-पुनर्निर्माण और दीर्घायु का आधार
कहा गया है।

आज भी वैद्य इसे कायाकल्प प्रयोगों की पहली सीढ़ी मानते हैं।… Read More