यद्यपि बेताल को भोगरूप में माँस-मछली प्रिय है तथापि यह देव दालभात से भी संतुष्ट हो जाता है। जो लोग शाकाहारी है और माँस-मछली का स्पर्श भी पाप समझते हैं वे दालभात का उपयोग बेतालभोग के लिए कर सकते हैं।यह मन्त्र सूर्य-चन्द्रग्रहण काल में शीघ्र जाग्रत होता है। किसी एकान्त स्थान में (घर के एकान्त…...

Premium Membership Required

You must be a Premium member to access this content.

Join Now

Already a member? Log in here

ग्रहण को सम्पूर्ण ग्रहण तक जाप करे.प्रयोग : दिन : मंगलवार से शुरुआत करेंसमय :रात्री दस बजे के बादसंख्या :31 माला जपदिवस : 41 दिन तक करेंदिशा :उत्तर मे अपना मुख रखे.दीपक :देसी घी का दीपक.इत्र :गुलाब का.अन्य :दीपक मे 2 बून्द इत्र 2 इलायची डालें रोज.भोग : दूध से बनी मिठाई का.भोजन: सात्विक रहेगा… Read More


सावधान : गुरु से पूछकर करे अन्यथा पीछा छुड़वाना कठिन हो जायेगा. बहुत उग्र साधना है साधना की विधि:🌙 रात्रि को 1 बजे टॉयलेट करते हुए या इंडियन स्टाइल बैठकर गुप्तांग खुला रखें।🔢 इस मंत्र को काले हकीक माला से 54 बार पढ़ना है।⏳ अनुभव चाहे जैसा भी हो, यहाँ से उठना बिलकुल मना है।📅…...

Premium Membership Required

You must be a Premium member to access this content.

Join Now

Already a member? Log in here

इस मंत्र का प्रतिदिन 21 माला जाप करना होता है सुबह या रात्रि के समय आप कर सकते हैं रात्रि काल में किया हुआ जाप ज्यादा फलदाई होता है |संख्या : कम से कम 21 माला रोजमाला : रुद्राक्ष की.समय: रात्रि काल मे या सुबह ब्रह्म मुहूर्त मे.वस्त्र :पीले कलर के रहेंगेआसन : पीला ऊनी…...

Premium Membership Required

You must be a Premium member to access this content.

Join Now

Already a member? Log in here

ॐ एक नमक रमता माता दूसरा नमक विरह से आता। तीसरा नमक औरी बौरी चौथा नमक रहै कर जोरी यह नमक अमुक’ खाये अमुक’ को छोड़ दूसरा नहीं जाये । दुहाई पीर औलिया की जो कहे सो सुने जो माँगे सो देय दुहाई गौरा पार्वती की दुहाई कामाख्या देवी की दुहाई गुरु गोरखनाथ की ।।… Read More


जैसे बिजली तो एक ही है उसी से पंखा भी चलता है हीटर भी चलता है प्रेस भी उसी से फ्रिज भी उसी मोबाइल भी चार्जिंग होती है उसी से बिजली के बल्ब जला कर प्रकाश भी किया जाता है।यही हाल मंत्रों का भी है। समस्त देवताओं से षट्कर्म ताड़न और शांति तथा पुष्टि कर्म… Read More


साधना में साधक के सामने सबसे बड़ा समस्या आता है शुक्र धातु का बचाव कैसे करे ,कई बार जब आप साधना करने बैठते है तो आपका वीर्य अपने आप निकलने की समस्या आती है क्योंकि साधना एक उर्जा जाग्रति का कर्म है और उर्जा वेग से शुक्र पिंघलकर गिरने लगता है |इसे साधक लोग ब्रह्मचर्य नाश ,शुक्र गिरना धात गिरना,तो कोई इसे नाईटफॉल कह देता है लेकिन असल में ये शुक्र धातु निकलता क्यों है ?

इसे लोग जिनका सप्त चक्र विकृत है या जिनका धातु प्रवृति बिगड़ा हुआ है इसे लोग इसके शिकार ज्यादा होता है फिर भले कफ बढ़ा हो या वात अथवा पित्त | जब आप जप करते है तो मूलाधार से एक उर्जा........

Premium Membership Required

You must be a Premium member to access this content.

Join Now

Already a member? Log in here

यह देवी वर्ग की एक अत्यंत गुप्त, प्रचंड और आकाशगामी शक्ति हैं।
इनका वास स्वयं आकाश में होता है और इनका भोग भी वहीं अर्पित किया जाता है।

Premium Membership Required

You must be a Premium member to access this content.

Join Now

Already a member? Log in here

यह साधना उन साधकों के लिए है जो सच्चे मन से ख्वाजा जिंदा पीर का दर्शन करना चाहते हैं और उनके आशीर्वाद से रूहानी इल्म, मानसिक शक्ति, और जीवन में बरकत प्राप्त करना चाहते हैं।
यह साधना पूरी श्रद्धा, पवित्रता और नियम से करने पर साक्षात दर्शन तक का अनुभव देती है।इस साधना की शुरुआत “नौचंदी रविवार” से करनी होती है

Premium Membership Required

You must be a Premium member to access this content.

Join Now

Already a member? Log in here