भैरवी-चक्र साधना योनि-पूजन November 17, 2025 हर स्त्री का शरीर स्वयं में एक दिव्य योनि–पीठ है, जिसके बाएँ कोण में ज्ञान-शक्ति, दाएँ कोण में इच्छा-शक्ति, और नीचे के कोण में क्रिया-शक्ति प्रतिष्ठित मानी गई है। तांत्रिक परंपराओं में इसे ही कुंडलिनी ऊर्जा का केंद्र कहा गया है। वेदों में भी स्त्री को पुरुष का भाग्य और ऊर्जा-स्रोत माना गया है, क्योंकि…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
क्या कोई महिला किसी को गुरु बना सकती है या गुरु बन सकती है ? November 17, 2025 यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि भगवान बुद्ध ने बहुत समय तक महिलाओं को दीक्षा नहीं दी थी लेकिन महाप्रजापती गौतमी के कारण उन्होंने महिलाओं को भी दीक्षा दी थी। जैन धर्म में भी बहुत समय तक महिलाओं को साध्वी नहीं बनाया जाता था लेकिन महावीर स्वामी के काल में नरेश दधिवाहन की…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
कब वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं November 17, 2025 १. घर में पूजा करने वाला एक ही मूर्ति की पूजा नहीं करें। अनेक देवी-देवताओं की पूजा करें। घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश नहीं रखें।२. शालिग्राम की मूर्ति जितनी छोटी हो वह ज्यादा फलदायक है।३. कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी… Read More Share this... Facebook Whatsapp Messenger Twitter Linkedin Threads Telegram Email Copy
घर का बंधन करणा November 16, 2025 तांत्रिक परंपराओं में ग्रहण-काल को अत्यंत प्रभावी माना गया है, क्योंकि इस अवधि में वातावरण की सूक्ष्म तरंगें सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक सक्रिय होती हैं। माना जाता है कि इस समय साधक द्वारा किया गया जप, संकल्प या ऊर्जात्मक प्रक्रिया अत्यधिक तीव्रता से प्रभाव ग्रहण करती है। इसी कारण कुछ परंपराओं में नौ माला जप को सिद्धि-प्राप्ति का प्रतीकात्मक मानक बताया गया है।… Read More Share this... Facebook Whatsapp Messenger Twitter Linkedin Threads Telegram Email Copy
हस्तमैथुन November 15, 2025 अत्यधिक हस्तमैथुन को आयुर्वेद में अतियोग की श्रेणी में रखा गया है, जहाँ किसी भी प्राकृतिक क्रिया का अति-प्रयोग धातुक्षय, ओज-क्षय, तथा वातदोष वृद्धि का कारण बनता है। आयुर्वेद के अनुसार वीर्य धातु न केवल शरीर को पुष्ट करता है बल्कि ओज का मुख्य आधार माना गया है। बार-बार वीर्यस्खलन होने पर धातु-परंपरा में बाधा…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
गुप्त धन का मंत्र November 14, 2025 सिध्द विधिहवन के साथ जाप करे सुबह शाम बंग्लापान लौंग इलाइची, नारियल इनमे वर्णित सभी शक्तीओ के नाम मे रखेहवन-घी के साथ, दशांग धुप के साथ करेनवरात्र मे या किसी भी शुभ मुहूर्त से 11 दिन साधना करे *पांव तरी धरतीऊपर उठे आकाशबनके खातिर गंगा मैयापानी के करे बौछारतब सुमरो सत्पुरुष केसबके सृष्टि सृजनहारसत्पुरुष के…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
अभिचार का एक रूप निगड November 14, 2025 कई बार हमारे दुश्मन हमारे घर के अंदर या घर के बाहर कोई वस्तु अभिमंत्रित करके जमीन के अंदर गाड़ देते हैं जिसे ढूंढना असम्भब की हद तक कठिन होता है । जब तक वह वस्तु पूरी तरह गल सड़ कर खत्म नहीं होती है तब तक उसका असर पूरी तरह खत्म नहीं होता है।बैसे… Read More Share this... Facebook Whatsapp Messenger Twitter Linkedin Threads Telegram Email Copy
माता वापस भेजने का मंत्र November 14, 2025 किसी भी उग्र स्वरूप माता को शक्ती को या खूनी खच्चर जो मांग करता हो यहा तक इंसान का बल लेना चाहते हो उसे भी शांत कर सकते है माता वापस भेजने का भी आदि बहुत से कार्य ले सकते है Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
मिर्चुक मसान साधना November 14, 2025 इस साधना को अगर साधक जलती चिता के समकक्ष करता है तो मात्र 108 मंत्र के अन्दर मशान को अघोरी लेकर समाने आता है अगर कोई साधक अग्नि समाधि लगाने को जानता है तो मात्र 3 बार मंत्र पढ़कर तीन थाली बजाने पर मशान समाने आता है। जो साधक नार्मल साधना करना चाहता है जो…... Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here
भैरव-साधना (सर्व-कार्य-सिद्धि) मन्त्र November 14, 2025 तंत्र-शास्त्र में भैरव को चेतना के परम जाग्रत रूप, “टाइम-ब्रेकर ऊर्जा” और “सर्व-विघ्न-नाशक तत्त्व” का प्रतीक माना गया है। भैरव साधना का मूल उद्देश्य किसी भी कार्य को बाहरी बल से सिद्ध करना नहीं, बल्कि साधक की एकाग्रता, साहस, और ऊर्जाओं के प्रवाह को इस स्तर तक उठाना है कि उसके लिए कठोर से कठोर परिस्थिति भी कार्य-पूरक बन जाए। इसीलिए इसे “सर्व-कार्य-सिद्धि” कहा गया है—क्योंकि साधक की चेतना इतनी तीक्ष्ण हो जाती है कि अवरोध स्वयं हटते चले जाते हैं। Premium Membership Required You must be a Premium member to access this content.Join NowAlready a member? Log in here